विधानसभा चुनाव : पाथरप्रतिमा सीट पर तीन शिक्षकों के बीच रोचक मुकाबला

विधानसभा चुनाव : पाथरप्रतिमा सीट पर तीन शिक्षकों के बीच रोचक मुकाबला

सुगंधी

कोलकाता, 30 मार्च । दक्षिण 24 परगना की पाथरप्रतिमा विधानसभा सीट राज्य की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है जो एक समय वामपंथ का मजबूत गढ हुआ करता था लेकिन विगत एक दशक से यहां तृणमूल का एकाधिकार रहा है। पिछले दो विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार समीर कुमार जाना ने यहां अने प्रतिद्वंदियों बडे अंतर से मात देने में सफल रहे हैं । पार्टी ने इस बार भी उन्हें उम्मीदवार बनाया है और वे जीत की हैट्रिक लगाने को लेकर आशावादी हैं।

समीर कुमार 38 साल तक शिक्षक रहे है। उनके दो मुख्य प्रतिद्वंद्वी भी शिक्षक रह चुके हैं। उनमें से एक भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार असित हालदार इसी जिले के दक्षिण गंगाधरपुर मके निवासी है जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार शुकदेव बेरा भी शिक्षण के पेशे से जुडे रहे हैं । अब देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से किस शिक्षक को जीत की खुशी मिलती है।

यनदियों और समुद्रों से घिरे सुंदरवन का जनपद पाथरप्रतिमा समुद्री तूफानों और चक्रवातों से प्रभावित रहा है। जहां तक चुनावी मुद्दों की बात है तो यहां इस बार अम्फन में टूटे नदी बांधों के पुनर्निर्माण और जेटी घाटों के निर्माण की चर्चा अधिक हो रही है।

तृणमूल उम्मीदवार समीर कुमार जाना की आयु 70 वर्ष से अधिक है। पाथरप्रतिमा के दिगंबरपुर ग्राम पंचायत में उनका जन्म हुआ। बातचीत में समीर कुमार हिन्दुस्थान समाचार को यह बताया नही भूले की उनके पंचायत को भारत में सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत का खिताब मिल चुका है। अपने राजनीतिक सफर के बारे में जाना ने बताया कि साल 1972 में वे कांग्रेस से जुडे । जब 1978 में पंचायत समिति का गठन किया गया था, तो वह पहले दो कार्यकालों के लिए समिति के सदस्य थे और फिर अगले कार्यकाल (88 -93) के लिए उपप्रधान रहे। उसके बाद मैं 1998 में तृणमूल के जन्म के बाद से पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष रहे। उन्होंने कहा कि वह 1999 के उपचुनाव तथा 2001 और 2006 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया लेकिन वे जीत नहीं पाए। उस दौरान माकपा के अत्याचार के कारण हमने अपने दस कार्यकर्ताओं को खो दिया। डेढ़ सौ घरों में आग लगाई गई। क्षेत्र में विकास का कोई निशान नहीं था। हम लगातार जनमत तैयार करते रहे और धीरे धीरे इलाके को अपने नियंत्रण में लिया।

समीर जाना ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया, चुनाव में मेरी जीत तय है। मैंने सुबह सुबह सीतारामपुर में जाकर जनसंपर्क किया है। अभिषेक बनर्जी आएंगे। दोपहर को घर पर स्नान करने के बाद, मुझे तैयारियों का ध्यान रखने के लिए बाहर जाना पड़ता है। बिल्कुल आराम नहीं है।

एक तरफ आजीविका की चिंता, और दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदा का डर - पाथरप्रतिमा के लोगों के लिए ये दोनों बडी चुनौती रही हैं। आपदाएं बार-बार आती हैं। पाथारप्रतिमा के लोग अभी तक बुलबुल और अम्फान के झटके से उबर नहीं पाए हैं। वे अपनी सुरक्षा के लिए पक्का बांध चाहते हैं।

सालों साल बीत गए। वादे पे वादे किए गये लेकिन वास्तविकता के धरातल पर कुछ नहीं हुआ। पाथरप्रतिमा विधानसभा क्षेत्र नदियों और समुद्र से घिरा 15 द्वीपों का एक समूह है। अम्फान चक्रवात में लगभग 35 किमी नदियां और समुद्री बांध नष्ट हो गए हैं। सभी टूटे बांध की मरम्मत अभी तक नहीं हो पाई है। जैसे तैसे कर के बांध बनाकर पानी को रोका गया है। हालांकि लोगों की असुविधा कम नही हो रही है।

सत्तारूढ़ दल के नेताओं को इस सवाल का सामना बार बार करना पड़ता है कि पक्का बांध अभी तक हर जगह क्यों नहीं बनाया गया है। अम्फान में भ्रष्टाचार के बारे में शिकायतें भी व्याप्त हैं। साल 2009 में, आयला चक्रवात आने से पाथरप्रतिमा सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हुआ था। उस समय, केंद्र सरकार द्वारा बांध की मरम्मत के लिए आवंटित राशि पर काम नहीं कर पाने के कारण लगभग चार हजार करोड़ रुपये वापस चले गए। इन सबको लेकर सत्ता पक्ष को बहुत शिकायतें सुननी पड़ रही हैं।

हालांकि समीर कुमार लापरवाही के किसी भी आरोप को मानने के लिए राजी नही नहीं हैं। उनके अनुसार इलाके के लोग जानते हैं कि हमने क्या क्या काम किया है।

लेकिन वास्तविकता यह है कि नदी नालों से घिरे द्वीप पर 60-65 जेटी घाट हैं। लम्बे समय से इनमे सुधार नहीं किया गया है। अम्फान के कारण कई घाट भी ध्वस्त हो गए हैं। कुछ घाटों के सामने धंसान होने से मुश्किलें और बढ़ जाती है। अधिकांश घाटों में पीने का पानी, शौचालय या यात्री छावनी की व्यवस्था नहीं हैं। यात्रियों को खुले आसमान के नीचे घंटों खड़े रहना पड़ता है। अचिन्त्यनगर, ब्रजबल्लभपुर, जी-प्लॉट सहित विभिन्न पंचायतों में कई ग्रामीण सड़क मिट्टी से दब गए हैं। बरसात के मौसम में, कीचड़ से होकर यात्रा करनी पड़ती है। अनाज, मछली आदि का उत्पादन यहां बडे पैमाने पर किया जाता है। हालांकि किसान मंडी होने के बावजूद कोल्ड स्टोरेज नहीं होने से किसान मुश्किल में पड़ जाते हैं।

साल 2011 में, तृणमूल उम्मीदवार समीर कुमार जना ने 52.39 प्रतिशत वोटों के साथ जीत हासिल की। सीपीएम 44.28 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर थी। भाजपा को केवल 1.95 प्रतिशत वोट मिले। साल 2016 में तृणमूल के उम्मीदवार के रूप में मुझे एक लाख सात हजार 595 वोट मिले। कांग्रेस को 93,802 और भाजपा को 6,942 वोट मिले। प्रतिशत के रूप में, यह क्रमशः 51.2, 44.6 और 3.3 है।

समीर जाना कहते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में, तृणमूल उम्मीदवार चंद्र मोहन जटुआ पाथरप्रतिमा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से लगभग 35,000 वोटों से आगे थे। यही हमारे लिये पर्याप्त राहत का कारण है। दूसरा, यहां भाजपा या वाम-कांग्रेस का संगठन नहीं है। लोग निश्चित रूप से तृणमूल कांग्रेस को वोट देंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य में दूसरे चरण के अंतर्गत दक्षिण 24 परगना के पाथप्रतिमा क्षेत्र में एक अप्रैल को मतदान होना है।