श्रद्धापूर्वक याद किए गए बेगूसराय में पहली बार कमल खिलाने वाले डॉ. भोला सिंह

बेगूसराय, 19 अक्टूबर । करीब 50 वर्षों तक विधानसभा से लेकर लोकसभा तक सिंहनाद करने वाले राजनीति के प्रतीक भाजपा के सांसद, विधानसभा उपाध्यक्ष और मंत्री रहे डॉ. भोला सिंह को तीसरी पुण्यतिथि पर मंगलवार को श्रद्धापूर्वक याद किया जा रहा है। बेगूसराय में पहली बार कमल खिलाने वाले राजनीति के योद्धा को याद करने वालों का सुबह से ही सोशल मीडिया पर तांता लगा हुआ है। डॉ. भोला सिंह के निधन के बाद उनके संसदीय क्षेत्र बेगूसराय का राजनीतिक उत्तराधिकारी बने केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा है कि हर दिल और कण-कण में निवास करने वाले पूर्व सांसद आदरणीय भोला बाबू को उनकी तीसरी पुण्यतिथि पर नमन करता हूं। भोला बाबू राजनीति के अजेय योद्धा ही नहीं, संसदीय राजनीति के सूर्य थे। उन्हें बेगूसराय के इतिहास ही नहीं बिहार के राजनीतिक इतिहास में याद किया जाएगा।

सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश विक्रम ने बताया कि तीन जनवरी 1939 को बेगूसराय जिला (तत्कालीन मुंगेर जिला) के सूदूरवर्ती गांव दुनही में साधारण किसान रामप्रताप सिंह के घर टुनकी देवी के गोद में जब किलकारी गूंजी थी तो किसी को कहां यह पता था कि राजनीति का एक अजेय योद्धा अवतरित हो चुका है। 1967 में छात्रहित के मुद्दे पर उगते सूरज से विधानसभा पहुंच कर राजनीति की शुरूआत करने वाले दिवंगत सांसद भोला सिंह ना केवल आठ बार विधानसभा पहुंचे। बल्कि, राजनीति के इस भीष्म पितामह ने बेगूसराय जिला में पहली बार वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में कमल खिलाया था। इसके बाद दो बार मुश्किल हालत में भी कमल खिला कर संसद भवन पहुंचे। 2009 के नवादा लोकसभा क्षेत्र में बाहुबली पूर्व सांसद सूरजभान सिंह को पटखनी देकर संसद भवन में अपना जगह पक्का कर लिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में जन्मभूमि बेगूसराय की सेवा करने पर अड़ गए तो सबको हक्का-बक्का कर डंका बजा दिया। बेगूसराय के सांसद बने तो बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह द्वारा स्थापित इस औद्योगिक राजधानी के ध्वस्त हो चुकी औद्योगिक संरचना के विकास के लिए संसद भवन से लेकर प्रधानमंत्री तक कई बार आवाज उठाया। जिसके कारण बरौनी रिफाइनरी में पॉलीप्रोपलीन यूनिट स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।

बंद हो चुके बरौनी खाद कारखाना का पुनर्निर्माण हो रहा है। सिमरिया में छह लेन का सड़क पुल के साथ रेल पुल बन रहा है। सामाजिक सरोकार से जुड़कर शैक्षणिक प्रतिबद्धता के सहारे राजनीतिक क्षेत्र में अपने कृतित्व से महानता को प्राप्त करने वाले भोला सिंंह कहा करते थे किि राजनीति की देवी झोपड़ियों में वास करती है। मैं नीलकंठ मैं अजर अमर, मृत्यु पास खड़ी भयभीत मगर, मैं डमरू वादक आगों का शोला हूं, मैं सदा जीवित हूं, हां मैं ही भोला हूं की खनकती आवाज 19 अक्टूबर 2018 की देर शाम सदा के लिए गुम हो गई। लेकिन, मुखमंडल पर सूर्य सा तेज लिए अपनी वाकपटुता से सम्पूर्ण राष्ट्र को मंत्रमुग्ध कर शीर्ष नेतृत्व से सीधे दो टूक बात करने की जो अद्भुत कला उनमें थी, वह आज और आने वाले कल की युवापीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।