छत्तीसगढ़ को आदिवासी राज्य घोषित किया जाए : रिजवी

आदिवासी के हक का हनन भाजपा-कांग्रेस दोनों ने किया

संख्या बल के आधार पर आदिवासी उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग

रायपुर, 16 नवंबर । जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख व वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने सोमवार को प्रदेश के आदिवासियों के हक के हनन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है तथा यहां का मूल निवासी भी आदिवासी समाज ही है। देश की आजादी के आन्दोलन में भी इस वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया था। इतिहास भी यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में एक समय था जब यह गोंडवाना राज्य के अन्तर्गत आता था। यहां के राजा एवं जमींदार लगभग सभी आदिवासी समाज के हुआ करते थे। देश की आजादी के आन्दोलन में भी इस वर्ग ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया तथा जब भी उन्हें देशभक्ति का प्रमाण देने जरूरत पड़ी तो उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए बखूबी अपना फर्ज निभाया, इसलिए यह लाजमी व वक्त का तकाजा है कि छत्तीसगढ़ को आदिवासी राज्य घोषित किया जाय।

रिजवी ने कहा कि यह वर्ग बहुत ही सीधा, सौम्य एवं सरल व्यक्तित्व का है, जिसका वाजिब विकास आज तक नहीं हो पाया है। आदिवासी समाज को सभी राजनैतिक दलों ने नेतृत्व का दर्जा देना उचित नहीं समझा। वर्तमान में प्रदेश की विधानसभा में संख्या बल के आधार पर सबसे ज्यादा संख्या इसी वर्ग की है। कायदे से तो इस वर्ग के विधायकों में से ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। परन्तु खेद का विषय है कि कांग्रेस एवं भाजपा ने किसी आदिवासी को मुख्यमंत्री तो क्या उपमुख्यमंत्री के दर्जे के लायक भी नहीं समझा जो कांग्रेस एवं भाजपा की नजरों में आदिवासियों की दयनीय स्थिति का परिचायक है। यदि प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री इस वर्ग के प्रति न्याय करना चाहते हैं तो आदिवासी मंत्रियों में से किसी एक को उपमुख्यमंत्री बनाकर इस वर्ग को गरिमा प्रदान करें। उन्होंने सीएम से आग्रह किया कि आंध्रप्रदेश की तर्ज पर अनुसूचित जाति एवं सामान्य वर्ग से भी दो उपमुख्यमंत्री बनाने की हिम्मत जुटाएं।