क्या है एमआर से फर्जी एसपी बने आलोक का सफर, कथित गुरु खोल सकता है राज

क्या है एमआर से फर्जी एसपी बने आलोक का सफर, कथित गुरु खोल सकता है राज

बेगूसराय, 09 दिसंबर । बिहार के बेगूसराय में पुलिस ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के फर्जी एसपी को पकड़कर जेल भेज दिया है। फर्जी एसपी बनकर रौब जमाने वाले युवक को गिरफ्तार कर जेल भेजने के बाद प्रशासन इसे भले ही सिर्फ फर्जीवाड़ा का मामला समझे लेकिन यह मामला सिर्फ फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर देखा जाए तो बड़ा प्रश्न चिन्ह है। अपने को आईबी का एसपी और पटना का एसीपी बताने वाला आलोक सिंह उर्फ आलोक राणावत पिछले करीब दो महीनों से ना सिर्फ बेगूसराय के विभिन्न विभागीय अधिकारियों पर अपना धौंस जमाकर काम की पैरवी करवा लेता था, बल्कि पंचायत चुनाव के दौरान उसने मतदान केंद्र से लेकर मतगणना स्थल तक का पूरे रौब के साथ जायजा लिया तथा थानाध्यक्षों से सलामी दिलवाते हुए कई प्रतिबंधित जगहों पर भी आता जाता रहा।

सूत्र बताते हैं कि अगर इसे फर्जी अधिकारी बनाने वाले सरगना भरत की गहन जांच पड़ताल हो तो कई बड़े रहस्य का खुलासा हो सकता है। खगड़िया से आकर बेगूसराय में एमआर की नौकरी करने वाले आलोक सिंह उर्फ आलोक राणावत के एमआर से एसपी बनने तक की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। हिमालया कंपनी में एमआर की नौकरी छूटने के बाद बेगूसराय के एक गौशाला से आलोक में हुए बदलाव की कहानी उसकी गिरफ्तारी के बाद भले ही समाप्त हो गई हो लेकिन, आलोक को फर्जी अधिकारी बनाने वाले एक बाबा की गिरफ्तारी के बगैर मामलों का खुलासा होना संभव नहीं है। आलोक की मुलाकात बेगूसराय के एक गौशाला में धर्मगुरु कहने वाले से हुई और तभी से दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। दोनों ने मिलकर पहले तो नगर विकास विभाग के अधिकारी के आदर्श नगर स्थित मकान को ठिकाना बनाया। उसके बाद मकान पर कब्जा करने के साथ-साथ फर्जीवाड़ा का खेल शुरू हो गया। आलोक ने एनसीआरबी नाम के एक एनजीओ और कथित मानवाधिकार संस्था से जुड़ा तथा उसका कार्ड बनवाने के बाद एक बड़े लग्जरी गाड़ी पर नेम प्लेट लगवा लिया। करीब तीन माह पहले आलोक ने प्रचारित किया कि वह 2013 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर चुका था लेकिन मामला न्यायालय में चला गया तथा न्यायालय का फैसला आने के बाद उसने आईबी ज्वाइन किया है। उसकी पहली पोस्टिंग पटना में बतौर एसीपी-सह-एसपी के पद पर हुई तथा बेगूसराय प्रक्षेत्र का चार्ज दिया गया है।

आलोक को फर्जी अधिकारी प्रसारित करने में कथित भरत बाबा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा दोनों ने मिलकर रौब जमाते हुए विभिन्न इलाकों में ठगी का धंधा शुरू कर दिया। उसका काम और बातचीत का तरीका देखकर लोग उसकी ओर आकर्षित होने लगे। पंचायत चुनाव का बिगुल बज गया तो उसने पंचायतों में जाकर नेटवर्क फैलाना शुरू किया तथा दर्जनभर से अधिक मुखिया से चुनाव जितवाने के नाम पर रुपए वसूल लिए। मंहगे गाड़ी पर घूमने वाला आलोक पुलिस अधिकारियों पर भी खूब रौब जमाता था। मतदान के दौरान बरौनी के कई मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी उसके आगे-पीछे जय हिंद-जय हिंद करते रहे, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। वह तो भला हो पीड़ित लोगों का, जिसने इंटेलिजेंस ब्यूरो और एसपी को इसके कारनामों की जानकारी दी और आलोक पकड़ा गया। फिलहाल बेगूसराय में आलोक के साथ रहने वाली उसकी दूसरी पत्नी और गुरु भूमिगत हो चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि खुफिया तंत्र और पुलिस के वरीय पदाधिकारी गहन छानबीन करें तो कई बड़े रहस्य का खुलासा हो सकता है। यह पता चल सकता है कि अपने को आईआईटीएन कहने वाले कथित बाबा के साथ मिलकर आलोक व्यवस्था पर कितना बड़ा सवाल खड़ा कर रहा था।