अपने गृहनगर में सम्मान से अभिभूत हुए कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज

अपने गृहनगर में सम्मान से अभिभूत हुए कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज

मंच पर आकर ही संतुष्टि मिलती है कलाकार को- डॉ. नीलकंठ तिवारी

-उप्र संगीत नाटक अकादमी में पंडित बिरजू महाराज का सम्मान

-नृत्य केवल मनोरंजन नहीं है, ईश्वर की आराधना है: पंडित बिरजू महाराज

-मेरी इच्छा है कि बनारस की तरह लखनऊ को भी सजाया जाय

-मैं मजबूरी में दिल्ली में फंसा हूं : पंडित बिरजू महाराज

लखनऊ, 24 नवम्बर । कथकाचार्य और नर्तक कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज बुधवार को अपने गृहनगर लखनऊ में सम्मानित होकर अभिभूत हो गए। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के तत्वाधान में संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में आयोजित भव्य समारोह में संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. नीलकंठ तिवारी ने पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज को सम्मानित किया।

प्रसिद्ध गायिका मालिनी अवस्थी, संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम और प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना शाश्वती सेन की उपस्थिति में शाल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्म भेंटकर उन्हें सम्मानित किया गया। इस मौके पर पंडित बिरजू महाराज ने श्रोताओं के अनुरोध पर ठुमरी एवं भजन भी सुनाए।

समारोह में संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि कोरोना के संकट को पूरे विश्व ने झेला। इस संकट से पर्यटन व्यवसाय पर भी बुरा असर पड़ा, कलाकारों को बहुत मुश्किल उठानी पड़ी।

उन्होंने कहा कि कलाकार को मंच चाहिए। कलाकार जब तक मंच पर नहीं आता है, उसे संतुष्टि नहीं मिलती। कलाकार की आत्मा कचोटती है और वह मानसिक रूप से परेशान हो जाता है।

उन्होंने कहा कि संस्कृति विभाग की ओर से कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए अनवरत कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। वाराणसी में नवरात्रि महोत्सव में नगर से जुड़े अधिकतम कलाकारों को मंच प्रदान किया गया। वे मंच पर प्रदर्शन कर बहुत प्रफुल्लित हुए क्योंकि उन्हें संकट के कारण लंबे समय बाद मंच मिल पाया था। उन्होंने कहा कि पंडित बिरजू महाराज सभी कलाकारों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि उन्हें लंबी आयु मिले और वे लंबे समय तक हम सबके बीच रहें।

तय था पहले लखनऊ आऊंगा : बिरजू महाराज

सम्मान से अभिभूत पंडित बिरजू महाराज ने कहा कि कोरोना संकट के कारण मैं लंबे समय से घर से नहीं निकल सका था, लेकिन मन में इरादा था कि जब भी फिर से जो सफर शुरू करूंगा तो लखनऊ से ही करूंगा। मैं लखनऊ में जन्मा हूं,। यहीं खेला हूं। उसी जगह पर जहां आज कथक संग्रहालय बन गया है। वह याद आज भी बनी हुई है। जब इस भूमि पर आता हूं तो प्रणाम करता हूं कि मैं लखनऊ अपने घर आ गया हूं।

मैं मजबूरी में दिल्ली में फंसा हूं : पंडित बिरजू महाराज

उन्होंने कहा कि मैं मजबूरी में दिल्ली में फंसा हूं। मैंने मुख्यमंत्री योगी से भेंटकर उनसे कहा है कि कुछ ऐसी बात करें यहां पर कि हम यहां रह सकें। अपने जीवन का आखिरी वर्ष यहां रहकर बच्चों को सिखाने में बीता सकें।

नृत्य केवल मनोरंजन नहीं है, ईश्वर की आराधना है

पंडित बिरजू महाराज ने कहा कि नृत्य केवल मनोरंजन नहीं है, ईश्वर की आराधना है। हर हरकत में ईश्वर की आराधना है। उन्होंने कहा कि मीराबाई, सूरदास सभी ने संगीत के सहारे ही ईश्वर को प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि हम घुंघरू बजाकर ईश्वर को याद करते हैं। उन्हें बुलाते हैं।

मेरी शादी का सारा भार गिरिजा देवी ने उठाया

पंडित बिरजू महाराज ने कहा कि विदुषी गिरिजा देवी के गुरु श्रीचंद मिश्र मेरे श्वसुर थे। मेरी शादी का सारा भार गिरिजा देवी ने ही उठाया था।

कलाकारों की प्रतिमाएं लगाई जाए

पंडित बिरजू महाराज ने कहा कि विदेशों में विभिन्न क्षेत्र के अच्छे कार्य करने वाले लोगों की प्रतिमाएं लगती हैं। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि देश में जगह-जगह कलाकारों की प्रतिमाएं लगाई जाएं।

मेरी इच्छा है कि बनारस की तरह लखनऊ को भी सजाया जाय

उन्होंने कहा कि मैं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का अध्यक्ष रहा हूं। मुझे यहां से जोड़े रखें, मुझे अच्छा लगेगा। उन्होंने कहा कि जितना बनारस को सजाया गया है, उतना ही लखनऊ को भी सजाया जाना चाहिए, ऐसी हमारी इच्छा है।

इस मौके पर प्रसिद्ध गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि पंडित बिरजू महाराज जी जितना अच्छा नृत्य करते हैं, उतना ही अच्छा गाते हैं और उतना ही अच्छा वादन भी करते हैं। इससे पहले आरंभ में अकादमी के सचिव तरुण राज ने अतिथियों का स्वागत किया तथा अकादमी की गतिविधियों की जानकारी दी। इस मौके पर प्रशंसकों के अनुरोध पर पंडित बिरजू महाराज ने भक्ति रचना और ठुमरी सुनाकर भावविभोर कर दिया।

कथक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

समारोह में कथक प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया। आरंभ में प्रसिद्ध कथक नर्तक मधुकर आनंद के पुत्र आर्यव आनंद ने एकल कथक नृत्य किया। इस मौके कथक केन्द्र के कलाकारों ने सुरभि शुक्ल के निर्देशन में नमामि रामम् नृत्य नाटिका प्रस्तुत की।

श्री राम का मर्यादित चरित्र मानव समाज के लिए आदर्श का प्रतीक है। भगवान श्रीराम को विष्णु का अवतार माना गया है। श्री राम जी ने सदैव कर्म की महत्ता को स्थापित किया तथा छोटे- बड़े, ऊंच -नीच के भेद को नकारते हुए शबरी के जूठे बेर खाए, केवट, निषाद राज, जटायु आदि को गले लगाया और प्रेम को सर्वाेच्च मान्यता प्रदान की। श्री राम के बारे में कहा गया है, रामहि केवल प्रेम पियारा। नारी की मर्यादा को स्थापित करने हेतु श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करके राक्षस राज रावण का वध किया तथा धर्म की सत्ता स्थापित की प्रस्तुत नृत्य नाटिका रामायण नमामि रामम में श्री राम के इन्हीं मर्यादित कृत्यों का बहुत सुंदर रूप से चित्रण किया गया है नाटिका नमामि रामम का निर्देशन सुप्रसिद्ध नृत्यांगना डॉ. सुरभि शुक्ला ने किया।

नृत्य नाटिका में भाग लेने वाले कलाकारों में डा. सुरभि शुक्ला, श्रुति शर्मा, नीता जोशी, प्रियम यादव, अदिति जायसवाल, विधि जोशी, पाखी सिंह, अंतरा सिंह, डिम्पल वीरवानी, सताक्षी मिश्र, समृद्धि मिश्रा, रश्मि पांडे, सृष्टि प्रताप, अनुष्का यादव, आकृति कपूर, शिवांगी बड़वाल, अनन्या कृष्ण राज ने साथ दिया।

इसके अलावा संगत कलाकार में संगीत एवं गायन कमलाकांत, तबला एवं छंद संयोजन, राजीव शुक्ला, पढ़ंत एवं सहलय वाद्य पार्थ प्रतिम मुखर्जी,बांसुरी श्री दीपेंद्र कुंवरसितार डॉक्टर नवीन मिश्र , रूप सज्जा शहीर ने की। प्रस्तुति कथक केंद्र, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से की गई।