बिहार: राजधानी के 100 साल पुराने मदरसे का अस्तित्व खतरे में, चार के कंधे पर 24 का भार

बिहार: राजधानी के 100 साल पुराने मदरसे का अस्तित्व खतरे में, चार के कंधे पर 24 का भार

-जूनियर में एक और सीनियर सेक्शन में मात्र तीन शिक्षक

पटना, 11 अक्टूबर । बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर हमेशा जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाले नीतीश कुमार ईमानदारी से प्रयास करते हैं लेकिन पक्षपाती सोच वाले अधिकारी उनके प्रयासों में बाधा डालते रहते हैं और जानबूझकर लापरवाही दिखाते हैं। इसकी बानगी का सबूत है राजधानी पटना के सबसे पुराने शम्स-उल-हुदा मदरसा, जिसका अस्तित्व खतरे में हैं।

मात्र चार शिक्षकों के भरोसे पूरा मदरसा है। इसमें जूनियर सेक्शन में तो मात्र एक शिक्षक मौलाना मोहम्मद असलम है, वहीं सीनियर सेक्शन में तीन शिक्षक, मौलाना मकसूद अहमद कादरी नदवी, मौलाना आफताब आलम रहमानी और कलीम अख्तर है, जबकि मदरसा में कम से कम 16 शिक्षक और आठ कर्मचारियों की क्षमता है।

बिहार में पहले से स्थापित 1128 संबद्ध मदरसों में से केवल एक बिहार शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में है, जबकि नीतीश कुमार के शासन के तहत पारित शेष 1,127 और 1,2459 संबद्ध मदरसे अनुदान सहायता श्रेणी में हैं। अधीनस्थ लेकिन मदरसा बोर्ड के अंतर्गत आते हैं। शम्स-उल-हुदा मदरसा के शिक्षकों और कर्मचारियों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं।

शिक्षा विभाग के निदेशक व अन्य अधिकारियों के पास कई फाइलें धूल में पड़ी हैं लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। शर्मनाक स्थिति यह है कि शम्स-उल-हुदा मदरसा के जूनियर सेक्शन में सिर्फ एक शिक्षक मौलाना मोहम्मद असलम ही बचे है और वह भी जनवरी 2022 में सेवानिवृत हो जाएगा। तब मदरसे का जूनियर सेक्शन पूरी तरह से खाली हो जाएगा और सिर्फ छात्र ही बचे रहेंगे।

कनिष्ठ वर्ग के लिए सहायक मौलवी के छह पद, सहायक शिक्षक का एक पद, उप-संवर्ग के सहायक मौलवी के तीन पद और सहायक शिक्षक के एक पद अर्थात शिक्षकों के कुल 11 पद कनिष्ठ खंड में रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा वरिष्ठ वर्ग में केवल तीन सहायक शिक्षक बचे हैं जबकि बिहार शिक्षा सेवा कक्षा दो के सहायक मौलवी के तीन पद और सहायक शिक्षक के दो पद यानी कुल पांच शिक्षक खाली पड़े हैं।

वरिष्ठ वर्ग में बीपीएससी द्वारा पुनर्वास किया जाता है। वरिष्ठ वर्ग में शिक्षकों के 9 पद स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से कुल 6 पद रिक्त हैं। कनिष्ठ एवं वरिष्ठ दोनों वर्गों में एक कार्यालय लिपिक, एक छात्रावास चौकीदार, एक मुख्य भवन चौकीदार, एक छात्रावास सफाई कर्मचारी, एक कनिष्ठ वर्ग जलपान एक, वरिष्ठ वर्ग जलपान एक, छात्रावास जल एक तथा कार्यालय में कुल 8 रिक्तियां हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा क्लर्क और प्रथम श्रेणी के कर्मचारियों का पुनर्वास किया जाता है। वर्तमान में केवल तीन वरिष्ठ और केवल एक कनिष्ठ शिक्षक बचा है और उनकी मदद से सौ साल पुराना यह ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान आज भी मौजूद है। इसलिए मदरसे की स्थिति खराब हो गई है।

अधिकारियों के नकारात्मक रवैये से पता चलता है कि इस प्राचीन और महान और ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान का अस्तित्व खतरे में है और इस संस्था को बंद करने के लिए खतरनाक साजिशें रची जा रही हैं। जो निंदनीय है।लाखों मुसलमान दहशत की स्थिति में हैं। जिन्हें अपने गौरवशाली शिक्षण संस्थान के बंद होने का डर सता रहा है। इसे बचाने और बढ़ावा देने के लिए विद्वान और तथाकथित मुस्लिम बुद्धिजीवी भले ही लापरवाह हों, लेकिन पूरे राज्य के आम मुसलमान इस संबंध में बहुत गंभीर और चिंतित हैं।