तेरह वर्ष से छठ कर रही जमीला खातून बनी समाजिक सौहार्द का रोल मॉडल

तेरह वर्ष से छठ कर रही जमीला खातून बनी समाजिक सौहार्द का रोल मॉडल

- 2008 में मांगी थी मन्नत, पूरी हुई तो सपरिवार कर रही है छठ

बेगूसराय, 20 नवम्बर ।सूर्योपासना के महापर्व छठ को लोग सनातन परंपरा और हिंदू धर्म का पर्व होने की बात भले ही कहें। लेकिन बेगूसराय में एक मुस्लिम परिवार ने लगातार 13वीं बार छठ का व्रत रखकर यह साबित कर दिया है कि छठ को किसी धर्म के बंधन में नहीं बांधा जा सकता है। यह आस्था, विश्वास और सामाजिक सरोकार का महापर्व है। मीडिया के हलचल से दूर रहकर 2008 से लगातार छठ का व्रत कर रही महिला है छौड़ाही प्रखंड के सिहमा निवासी जमीला खातून।

सामाजिक सौहार्द का रोल मॉडल बन चुकी जमीला भी अन्य व्रतियों की तरह स्वच्छता के साथ प्रसाद बनाती है। नहाय-खाय और खरना करती है, संध्या कालीन और प्रातः कालीन बेला में सूर्यदेव को अर्घ्य देती है। इसमें वह सिर्फ अकेली नहीं, बल्कि परिवार के सभी सदस्य और पड़ोसी पूरे मनोयोग से आस्था के साथ सहयोग करते हैं। छठ शुरू करने के बाद कुछ लोगों ने रोका भी और टोका भी, लेकिन मनोकामना पूरी हो जाने के कारण विश्वास ऐसा जगा कि उसने किसी की नहीं सुनी और लगातार छठ कर रही है। जिसके बाद अब वे लोग भी सहयोग करने लगे हैं।

जमीला ने बताया कि विश्वास से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं है, आस्था और विश्वास है तभी तो लोग पत्थर को देवता के रूप में पूजते हैं। 2008 में घर के सभी लोग बीमार रह रहे थे, मजदूरी भी ठीक से नहीं मिल पाता था। बच्चों के पालन-पोषण पोषण और विवाह की चिंता से परेशान रह रही थी। इसी दौरान छठ के समय गांव में लोगों से सुना कि छठ में मन्नत मांगने वालों की सभी इच्छाएं पूरी होती है। जिसके बाद हमने भी मन्नत मांगी की सूर्य देव और छठी मैया हम गरीबों पर कृपा कर दें तो हम भी छठ करेंगे। मन में ख्याल आया कि जब छठी मैया सबकी मनोकामना पूरी करती है तो हमारे परिवार की बिमारी, गरीबी और बेबसी का भी दूर कर देंगे। गांव के सभी लोगों ने छठ पर्व करने के लिए प्रेरित किया।

जिसके बाद इस पर्व के सभी विधि विधान को समझ कर 13 साल पहले पहली बार छठ पूरे नियम निष्ठा के साथ किया था। इसमें छठ पूजा करने वाले गांव के लोगों ने मेरे घर आकर काफी सहयोग किया। पहली बार छठ पूजा करने के एक साल के अंदर हमारा परिवार बीमारियों से छुटकारा पा गया, मजदूरी भी मिलने लगी है। उसके बाद से लगातार छठ कर रही है और जब तक जिंदा रहेगी जरूर करेगी, उसके बाद अपने पुत्र वधू को छठ करने के लिए प्रेरित करेगी। जमीला ने बताया कि उनके मजहब के लोग भी उनके छठ वर्त को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं और सहयोग करते हैं।