मप्र: नई शिक्षा नीति से एक आदर्श मनुष्य का होगा निर्माण: मुख्यमंत्री शिवराज

मप्र: नई शिक्षा नीति से एक आदर्श मनुष्य का होगा निर्माण: मुख्यमंत्री शिवराज

भोपाल, 17 जनवरी (हि.स.) । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया की अनेक समस्याओं का समाधान ज्ञान में समाहित है। स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह की शिक्षा की बात की थी, उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति के माध्यम से लागू करने का संकल्प लिया है। स्वामी विवेकानंद जी शिक्षा में चरित्र-निर्माण को प्रमुख मानते थे। शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान और कौशल के साथ ही नागरिकता के संस्कार देना भी है। नई शिक्षा नीति से एक देशभक्त, कर्मठ, ईमानदार और आदर्श मनुष्य के निर्माण का कार्य होगा।

मुख्यमंत्री चौहान सोमवार को सीबीएसई एवं शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रायोजित 27वें वार्षिक सहोदय कॉन्फ्रेंस को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि जब दुनिया में सभ्यता का सूर्य नहीं निकला था, तब भारत में तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षा की नींव रखी गई थी। उस प्राचीन नींव पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नव-निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत की शिक्षा प्रणाली आधुनिक शिक्षा प्रणाली में विकसित हो रही है। डिजिटल इंफ्रा-स्ट्रक्चर का शिक्षा के लगभग सभी क्षेत्रों में उपयोग किया जा रहा है। स्कूल परिसरों की अवधारणा पिछले एक दशक में मजबूत हुई है। सीबीएसई बोर्ड के साथ पंजीकृत स्कूलों के परिसरों की संख्या कई गुना बढ़ी है। सीबीएसई शिक्षा के लिए नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 27वें वार्षिक स्नेह सम्मेलन के आयोजन का दायित्व मध्यप्रदेश की ग्वालियर की सहोदय समिति को मिला है, जो प्रसन्नता का विषय है। भारत की कुछ प्रमुख सहोदय समितियों में से एक यह समिति बहुमुखी शिक्षा का मंच है। समिति ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के स्कूलों में आवश्यक समन्वय में सफल रही है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने का संकल्प है। साथ ही सीएम राइज विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जो पुस्तकालय, प्रयोगशाला जैसी जरूरी सुविधाओं से लैस होंगे। ग्लोबल स्किल पार्क युवाओं को हुनर में दक्ष बनाकर रोजगार के लिए सहयोग करेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने अपने प्राइमरी स्कूल टीचर रतन चंद जैन का स्मरण भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा शिक्षक विद्यार्थियों को गढ़ने का कार्य करते हैं। उनका सदैव सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर एक भारत-श्रेष्ठ भारत स्मारिका का विमोचन और कला प्रदर्शनी का आयोजन भी हुआ। सरकार की शिक्षा सचिव अनीता करवाल, सीबीएसई के अध्यक्ष मनोज आहूजा और सीबीएसई के निदेशक जोसेफ एम्मानुएल उपस्थित थे।

अध्यक्ष सहोदय समिति ग्वालियर निशि मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि समिति व्यास पीठ के रूप में ग्वालियर के विद्यालयों के प्राचार्यों के वैचारिक आदान-प्रदान का योगदान दे रही है। वर्ष 2005 में 16 सदस्यों के साथ स्थापित ग्वालियर समिति आज 50 से अधिक विद्यालय सदस्य हैं और सीबीएसई के सहोदय कार्यों में सच्चे अर्थों में योगदान दे रहे हैं। देश में इनकी संख्या 200 से अधिक है। सीबीएसई सहोदय स्कूल कॉम्पलेक्सेज उन संबद्ध स्कूलों का समूह है, जो स्कूली शिक्षा में पठन-पाठन के बेहतर तरीकों, नवाचारों को लागू करने के लिए रणनीति बनाकर कार्य करते हैं। ये विद्यालय स्वैच्छिक रूप से एकजुट होकर पाठ्यक्रम बनाने, मूल्यांकन कार्य, अध्यापन कार्य और शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण के प्रयासों में सहयोग करते हैं।

कॉन्फ्रेंस में सहोदय परिवार के विद्यालय, अधिकारी और जन-प्रतिनिधियों ने एक्चुअल और वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया। करीब 7 हजार विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक, पालक और विद्यार्थी इससे जुड़े। कॉन्फ्रेंस को केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार ने भी संबोधित किया। रामकृष्ण मिशन ग्वालियर के स्वामी सुप्रदीपतानंद भी उपस्थित रहे।