मप्रः मूंग उपार्जन एवं भंडारण में पारदर्शिता के लिये मापदण्ड निर्धारित

भोपाल, 04 अगस्त। राज्य शासन द्वारा मूंग उपार्जन एवं भण्डारण के लिये गोदाम का चयन पूरी पारदर्शिता से करने के लिये मापदण्ड निर्धारित किये गये हैं। मूंग भण्डारण के संबंध में मिलने वाली शिकायतों के दृष्टिगत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप वेयर-हाउस के चयन के संबंध में प्रमुख सचिव खाद्य फैज अहमद किदवई ने सभी कलेक्टर को पत्र लिखा है।

जनसम्पर्क अधिकारी मुकेश दुबे ने गुरुवार को उक्त जानकारी देते हुए बताया कि प्राथमिकता के क्रम में सर्वप्रथम मूंग का उपार्जन और भण्डारण शासकीय गोदाम में किया जाएगा। शासकीय गोदामों में उपलब्ध भण्डारण क्षमता की जानकारी आपूर्ति अधिकारी कलेक्टर को उपलब्ध कराएंगे एवं जानकारी की सत्यता का प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत करेंगे।

उन्होंने बताया कि शासकीय गोदामों में अनुमानित उपार्जन के लिये पर्याप्त भण्डारण क्षमता न होने की स्थिति में शेष भण्डारण एवं उपार्जन नागरिक आपूर्ति निगम के ऐसे अनुबंधित निजी गोदामों में किया जा सकेगा, जिनके परिसर में वे-ब्रिज की सुविधा उपलब्ध हो। ऐसे गोदाम, जिनके 4 किलोमीटर की परिधि के भीतर वे-ब्रिज की सुविधा उपलब्ध हो और इसके बाद ऐसे निजी गोदाम, जो मुख्य राष्ट्रीय/राज्य/जिला मार्ग पर स्थित हों, को भण्डारण के लिए उपयोग में लिया जा सकेगा। पर्याप्त भण्डारण क्षमता उपलब्ध न होने की स्थिति में अन्य निजी गोदाम भण्डारण के लिये उपयोग में लिये जा सकेंगे।

भण्डारण के लिये 2 या अधिक निजी अनुबंधित गोदाम प्राथमिकता क्रम में एक समान स्थिति में हों, तो उस गोदाम को वरीयता दी जायेगी, जो पीएमएस (Preservation, Maintenance Security) का कार्य नागरिक आपूर्ति निगम से अनुबंधित एजेंसी को सौंपने के लिये लिखित रूप से सहमति देगा। गोदाम समान स्थिति में होने की दशा में पहले लायसेंस प्राप्त गोदाम को प्राथमिकता दी जायेगी।

भण्डारण के लिये निर्धारित मापदण्डों के अनुसार कलेक्टर चयनित गोदामों की प्राथमिकता क्रम में सूची तैयार कर उल्लेख करेंगे कि चयन किस प्राथमिकता क्रम के आधार पर किया गया है। उक्त सूची वेबसाइट एवं संबंधित कार्यालय के नोटिस-बोर्ड पर प्रदर्शित की जायेगी। कोई व्यक्ति इस संबंध में जानकारी माँगता है अथवा कोई आपत्ति दर्ज कराता है, तो उसे एक सप्ताह के भीतर निराकरण किया जायेगा।