भारत की युद्ध क्षमता का मूल्यांकन करेंगे सेना के कमांडर

भारत की युद्ध क्षमता का मूल्यांकन करेंगे सेना के कमांडर

- सेना के कमांडरों का चार दिवसीय सम्मेलन 26 अक्टूबर से दिल्ली में

- चीन-पाकिस्तान सीमाओं पर जमीनी स्थिति की होगी समीक्षा

- इसके अलावा सैन्य सुधार होगा सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर । भारतीय सेना का शीर्ष नेतृत्व 26 अक्टूबर से 4 दिवसीय कमांडरों के सम्मेलन में ​चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सेना की तैनाती और जमीनी स्थिति की परिचालन तत्परता की समीक्षा करेगा। सेना के शीर्ष कमांडर सम्मेलन में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ-साथ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भारत की युद्ध तत्परता का व्यापक मूल्यांकन करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 27 अक्टूबर को सेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। सम्मेलन का समापन भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के भाषण से होगा।

दिल्ली में सेना कमांडरों का यह सम्मेलन 26 से 29 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। इसमें सेना के वरिष्ठ अधिकारी, सेना के उपाध्यक्ष सहित सभी सेना कमांडर, सेना मुख्यालय के प्रधान कर्मचारी अधिकारी (पीएसओ) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और पाकिस्तान से लगी जम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सेना की तैनाती और जमीनी स्थिति की परिचालन तत्परता की समीक्षा करना है। दूसरे दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 27 अक्टूबर को सेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। रक्षा मंत्री से पहले सम्मेलन को सैन्य बलों के प्रमुख (सीडीएस) बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख संबोधित करेंगे।

सम्मेलन के तीसरे दिन विभिन्न आर्मी कमांडरों द्वारा पेश किए गए विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर गहन चर्चा की जाएगी। इसके बाद विभिन्न प्रधान कर्मचारी अधिकारियों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर संक्षिप्त जानकारी दी जाएगी। सम्मेलन के अंतिम दिन सीमा सड़क के महानिदेशक (डीजीबीआर) बीआरओ द्वारा किए जा रहे विभिन्न बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। सेना के शीर्ष कमांडर सम्मेलन में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ-साथ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भारत की युद्ध तत्परता का व्यापक मूल्यांकन करेंगे। सम्मेलन का समापन भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के भाषण से होगा।