असम: तेजपुर विवि के 18वें दीक्षांत समारोह को प्रधानमंत्री ने किया संबोधित- शोणितपुर-3

असम: तेजपुर विवि के 18वें दीक्षांत समारोह को प्रधानमंत्री ने किया संबोधित- शोणितपुर-3

.......... इसी कड़ी में संत श्रीमंत शंकरदेव की जन्मभूमि नगांव जिला के भटद्रवा में सदियों पुरानी लकड़ी पर उकेरी गई कला का प्रिजर्वेशन हो या गुलामी के कालखंड में लिखी गई असम की किताबों और पेपर का डिजिटलीकरण हो, वाकई में इतने विविध कामों में लगे हुए हैं, कोई भी इसको सुनेगा तो उसे गर्व होगा कि इतना दूर हिंदुस्तान के पूर्वी छोर पर तेजपुर में यह तपस्या हो रही है। साधना हो रही है। आप वाकई में कमाल का काम कर रहे हैं। मैंने जब इतना कुछ जाना तो मन में यह भी सवाल आया कि स्थानीय विषयों पर, स्थानीय आवश्यकताओं पर इतना काम, इतनी रिसर्च करने की प्रेरणा आपको कहां से मिलती है। इसका जवाब भी तेजपुर यूनिवर्सिटी के कैंपस में ही है। जैसे हॉस्टल के नाम चराईदेव, नीलांचल, कंचनजंघा, पाटकाई, धनसिरी, कपिली यह पर्वतों, नदियों और चोटियों के नाम हैं। यह सिर्फ नाम नहीं हैं, इस जीवन की जीती जागती प्रेरणा है।

उन्होंने कहा कि जीवन यात्रा में हमें अनेक मुश्किलों, अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कभी नदियों को पार करना पड़ता है। यह एक बार का काम नहीं होता। एक पर्वत चढ़ते हैं तो दूसरे की तरह बढ़ते हैं। हर पर्वतारोहण के साथ जानकारी भी बढ़ती है, विशेषज्ञता बढ़ती है। नई चुनौतियों को लेकर प्रोस्पेक्टिव तैयार हो जाता है। इसी तरह नदियां भी हमें बहुत कुछ सिखाती हैं। नदियां कई सहायक धाराओं से मिलकर बनती हैं और फिर समुद्र में मिल जाती हैं। हमें भी जीवन में अलग-अलग लोगों से ज्ञान लेना चाहिए। जब आप इस अप्रोच के साथ आगे बढ़ते हैं तो असम, नॉर्थ ईस्ट देश के विकास में अपना योगदान दे पाएगा।

कोरोना के इस काल में आत्मनिर्भर भारत अभियान हमारी वोकैबलरी का अहम हिस्सा बन गया है। हमारे सपनों के अंदर वह गुण मिल गया है। हमारा पुरुषार्थ हमारे संकल्प पर, हमारी सिद्धि, हमारे प्रयास सब कुछ उसके इर्द-गिर्द हम अनुभव कर रहे हैं लेकिन आखिर यह ज्ञान है क्या। आखिर बदलाव क्या हो रहा है। क्या यह बदलाव रिसोर्सेज में है। क्या यह बदलाव सिर्फ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में है। क्या यह बदलाव सिर्फ टेक्नोलॉजी में है। क्या बदलाव बढ़ती इकोनामी का और स्टडी के फाइट का है। ऐसे हर सवाल का जवाब हां में है लेकिन इनमें से भी जो सबसे बड़ा परिवर्तन है, वह इंस्ट्रिंग का एक्शन और रिएक्शन के नजरिए का है। हर चुनौती, ह समस्या से निपटने का हमारे युवा देश का अंदाज, देश का मिजाज अब कुछ हटकर है।

इसका एक ताजा उदाहरण अभी हमें क्रिकेट की दुनिया में देखा है। बहुतों ने भारतीय क्रिकेट टीम के ऑस्ट्रेलिया टूर को फॉलो किया होगा। इस टूर में क्या-क्या चुनौती हमारी टीम के सामने नहीं आई। हमारी इतनी बुरी हार होगी, इसके बावजूद हम उतनी ही तेजी से उभरे भी और अगले मैच में जीत हासिल की। चोट लगने के बावजूद हमारे खिलाड़ी मैच बचाने के लिए मैदान में डटे रहे। चैलेंजिंग कंडीशन इसमें निराश होने की वजह हमारे युवा खिलाड़ियों ने चैलेंज का सामना किया। नए समाधान तलाशे हैं। कुछ खिलाड़ियों में अनुभव जरूर कम था लेकिन, हौसला उतना ही बुलंद दिखा। उनको जैसे ही मौका मिला, उन्होंने इतिहास रच दिया। एक बेहतर टीम को अपने टैलेंट और अपने टेंपरामेंट में वह ताकत थी, जिससे उन्होंने इतने अनुभवी टीम को इतने पुराने खिलाड़ियों वाली टीम को पराजित कर दिया।

युवा साथियों ने क्रिकेट के मैदान पर हमारे खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस सिर्फ स्पोर्ट्स के लिए इंपोर्टेंट नहीं है, यह बहुत बड़ा लाइफ लेशन है। पहला लेशन हमें अपनी एबिलिटी पर विश्वास होना चाहिए। दूसरा लेशन हमारे माइंडसेट को लेकर है, हम अगर पॉजिटिव माइंड को लेकर आगे बढ़ते हैं तो रिजल्ट भी पॉजिटिव ही आएगा। तीसरा लेशन अगर आपके पास एक तरफ सेफ निकल जाने का ऑप्शन हो और दूसरी तरफ मुश्किल जीत का विकल्प हो तो आपको विजय का ऑप्शन जरूर एक्सप्लोरर करना चाहिए। अगर जीतने की कोशिश में कभी कभार असफलता भी हाथ लगे तो इसमें कोई नुकसान नहीं है। रिस्क लेने से, प्रयोग करने से डरना नहीं चाहिए। हमें प्रोएक्टिव और फीयरलेस होना ही पड़ेगा।

हौसले से भरा हुआ अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित भारत सिर्फ क्रिकेट के फील्ड पर दिखता है, ऐसा नहीं है। आप युवा भी तो इसकी एक तस्वीर हैं। आप सेल्फ कॉन्फिडेंस और आत्मविश्वास से भरे हुए, आप लीक से हटकर चलने से डरते नहीं हैं। आपके जैसे युवाओं ने कोरोना की लड़ाई में बहुत मजबूती दी है।