लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने की बीजद सांसद प्रमिला बिसोयी की सराहना

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने की बीजद सांसद प्रमिला बिसोयी की सराहना

- सदस्यों ने मेजें थपथपाकर महिला सांसद का किया सम्मान

नई दिल्ली, 09 दिसंबर । लोकसभा में गुरूवार को शून्यकाल के दौरान ओडिशा के पिछड़े इलाके से पहली बार चुनी गई महिला सांसद प्रमिला बिसोयी के लिए सदन में जमकर तालियां बजीं और अध्यक्ष ओम बिरला ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि यही लोकतंत्र की ताकत है।

दरअसल, शून्यकाल की कार्यवाही के दौरान सदस्यों को अपने क्षेत्र की समस्याएं उठाने का मौका दिया जाता है। इसी क्रम में अध्यक्ष बिरला ने ओडिशा के अस्का लोकसभा क्षेत्र से बीजू जनता दल (बीजद) सांसद प्रमिला बिसोयी को अपनी बात रखने का अवसर दिया। बिसोयी ने ओडिया भाषा में अपनी बात रखी ।

बिसोयी ने जब अपनी बात समाप्त की तो बिरला ने कहा, यही लोकतंत्र की ताकत है। बिरला ने प्रमिला से जुड़ा एक किस्सा सदन को सुनाते हुए कहा कि उन्होंने देखा कि महिला सांसद सदन में अपने क्षेत्र की समस्याएं उठाने से हिचकती हैं। इसलिए उन्होंने एक दिन महिला सांसद को अपने कार्यालय में बुलाया और उनसे कार्यवाही के दौरान अपनी बात रखने की पेशकश की। किंतु, ओड़िया के अलावा अन्य भाषा की जानकारी न होने के कारण प्रमिला झिझक रही थीं।

बिरला ने इसका समाधान निकालते हुए अपने स्टाफ से कहा कि वह प्रमीला की बात ओडिया भाषा में लिखकर उन्हें दें। उसके बाद बिसोयी ने पहली बार अपनी बात सदन में रखी और आज वह स्वयं नोट तैयार कराकर पूरे आत्मविश्वास से अपनी बात रख रही हैं। यही लोकतंत्र की ताकत है। बिसोयी के सम्मान में सभी सदस्यों ने मेजें थपथापाकर उनका अभिवादन किया।

बीजद सांसद भर्तृहरि माहताब ने बिसोयी की ओडिया में कही गई बात का हिन्दी में भाव प्रकट करते हुए कहा, प्रमिला ने कोरोना महामारी की स्थिति में सुधार के बाद के हालात की चर्चा करते हुए बताया कि पुरूष आमदनी के लिए अपने कामकाज और नौकरी पर बाहर चले गए। घर में महिलाएं रह गई हैं और उनकी समस्याओं की तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिए।

माहताब ने सदन को बताया कि ओडिशा के गंजाम जिले में चल रहे महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की मुखिया हैं। वो राज्य में सर्वाधिक स्वयं सहायता समूह का संचालन करती है और बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही हैं।

बिरला ने कहा कि प्रमिला बिसोयी का आग्रह रहता है कि अब हर रोज उन्हें बोलने का मौका दिया जाए। इस पर एक बार फिर पूरा सदन सदस्यों के मेज थपथपाने से गूंज उठा और बिसोयी ने हाथ जोड़कर अध्यक्ष और सदस्यों का अभिवादन किया।