देश की जनसंख्या स्थिर होने के संकेत, कुल प्रजनन दर 2.2 से घटकर 2 हो गई

देश की जनसंख्या स्थिर होने के संकेत, कुल प्रजनन दर 2.2 से घटकर 2 हो गई

- केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया एनएफएचएस-5 फैक्टशीट

नई दिल्ली । भारत में औसत प्रजनन दर में कमी दर्ज की गई है। कुल प्रजनन दर प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या 2.2 से घटकर 2.0 हो गई है। वहीं, समग्र गर्भनिरोधक प्रसार दर 54 फीसदी से बढ़कर 67 फीसदी हो गई है। बुधवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) फैक्ट शीट के अनुसार लगभग सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में गर्भ निरोधकों के आधुनिक तरीकों का उपयोग भी बढ़ा है। वहीं, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश को छोड़कर सभी राज्यों में प्रजनन क्षमता का प्रतिस्थापन स्तर (2.1) हासिल कर लिया है।

एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के अनुसार 12 से 23 महीने की आयु के बच्चों के पूर्ण टीकाकरण अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर 62 प्रतिशत से 76 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया है। इनमें 14 में से 11 राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में 12-23 महीने की आयु के बच्चों में तीन चौथाई बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया है। ओडिशा में 90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण किया गया है। इसका श्रेय सरकार द्वारा 2015 से शुरू किए गए मिशन इंद्रधनुष की प्रमुख पहल को दिया जा सकता है।

एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के अनुसार अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों का प्रतिशत 79 से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गया है। पुडुचेरी और तमिलनाडु में अस्पतालों में प्रसव 100 प्रतिशत है और दूसरे चरण के 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में से सात राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 90 प्रतिशत से अधिक है।

राष्ट्रीय स्तर पर बाल पोषण संकेतक में थोड़ा सुधार आया है। कुपोषण का प्रतिशत 38 से घटकर 36 हो गया है। कम वजन 36 प्रतिशत से घटकर 32 प्रतिशत हो गया है। सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में बाल पोषण के संबंध में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन यह परिवर्तन महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि इन संकेतकों के संबंध में बहुत कम अवधि में भारी बदलाव की संभावना नहीं है।

बच्चों और महिलाओं में एनीमिया चिंता का विषय बना हुआ है। एनएफएचएस-4 की तुलना में पांच की रिपोर्ट में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों और अखिल भारतीय स्तर पर गर्भवती महिलाओं द्वारा 180 दिनों या उससे अधिक समय तक आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) गोलियों के सेवन के बावजूद आधे से अधिक बच्चे और महिलाएं (गर्भवती महिलाओं सहित) एनीमिया से ग्रस्त हैं।

इन राज्यों में किया गया सर्वेक्षण-

अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, ओडिशा, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सर्वेक्षण किया गया। पहले चरण में शामिल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंध में एनएफएचएस-5 के निष्कर्ष दिसंबर, 2020 में जारी किए गए थे। एनएफएचएस-5 सर्वेक्षण कार्य देश के 707 जिलों (मार्च, 2017 तक) के लगभग 6.1 लाख नमूना परिवारों में किया गया है। इनमें जिला स्तर तक अलग-अलग अनुमान प्रदान करने के लिए 724,115 महिलाओं और 101,839 पुरुषों को शामिल किया गया।

131 प्रमुख संकेतकों को शामिल किया गया फैक्टशीट -

फैक्टशीट में 131 प्रमुख संकेतकों की जानकारी शामिल है। यह महत्वपूर्ण संकेतकों के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जो देश में सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्रगति को ट्रैक करने में सहायक होते हैं। एनएफएचएस-5 में विशेष ध्यान वाले कुछ नए क्षेत्र शामिल हैं, जैसे मृत्यु पंजीकरण, पूर्व-विद्यालय शिक्षा, बाल टीकाकरण के विस्तारित क्षेत्र, बच्चों के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों के घटक, मासिक धर्म स्वच्छता, शराब एवं तंबाकू के उपयोग की आवृत्ति, गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के अतिरिक्त घटक रोग, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी लोगों में उच्च रक्तचाप और मधुमेह को मापने के लिए विस्तारित आयु सीमा, जो मौजूदा कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा नीतिगत हस्तक्षेप के लिए नई रणनीति विकसित करने के लिए आवश्यक विवरण देगा।