बुद्ध के महाप्रसाद'' को ''जन के मन'' तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है सरकार

बुद्ध के महाप्रसाद'' को ''जन के मन'' तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है सरकार

- सिद्धार्थनगर में बन रही 12 करोड़ से सीएफसी

- कालानमक धान अनुसंधान केन्द्र खोलने की है तैयारी

- चीनी यात्री फाह्यान के यात्रा वृत्तान्तों में भी कालानमक की है चर्चा

गोरखपुर, 18 अक्टूबर । भगवान बुद्ध के महाप्रसाद काला नमक चावल की सुगंध को न सिर्फ विदेशियों तक सीमित रखने का प्रयास है बल्कि इसे जन-जन तक पहुंचाने की मुहिम के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र की मोदी व उत्तर प्रदेश की योगी सरकारों ने महज कुछ ही वर्षों में सबको अपनी मंशा से अवगत करा दिया है। कालानमक चावल की उपलब्धता को बौद्ध धर्मावलंबियों के अलावा हर व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश में है।

, सिद्धार्थनगर और संत कबीरनगर का एक जिला एक उत्पाद घोषित किया है। इससे इन सरकारों की बेताबी झलक रही है। सत्य, अहिंसा और शांति का पाठ पढ़ाने वाले बुद्ध के महाप्रसाद से जन-जन में वह गुण आरोपित करने की कोशिश कह सकते हैं।

तकनीक का सहारा ले वैश्विक फलक पर चमका रही सरकार

बुद्ध का महाप्रसाद प्रमुख बौद्ध देशों दक्षिण कोरिया, चीन, जापान, म्यांमार, कंबोडिया, मंगोलिया, वियतनाम, थाईलैंड, श्रीलंका, भूटान तक पहुंचाने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. नवनीत सहगल भी लगे हुए हैं। उनकी कोशिशों से कालानमक धान की बिक्री आनलाइन उपलब्ध है।

हो रहा काला नमक का निर्यात

राज्य व केंद्र सरकार के प्रयास से कालानमक चावल अब सिद्धार्थनगर और गोरखपुर जिले से निकलकर सिंगापुर और नेपाल पहुंच चुका है। सिद्धार्थनगर में कालानमक महोत्सव का आयोजन कर योगी सरकार इसकी ब्रांडिंग कर रही है। योगी सरकार की कोशिश अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र वाराणसी के सहयोग से सिद्धार्थनगर में अनुसंधान केन्द्र खोलने की भी है।

गौतम बुद्ध से जुड़ाव का यह है ऐतिहासिक पक्ष

कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामचेत चौधरी के मुताबिक कालानमक धान सिद्धार्थनगर के बजहा गांव में गौतम बुद्ध के कालखण्ड से पैदा होता आ रहा। मान्यता है कि महात्मा बुद्ध ने हिरण्यवती नदी के तट पर इसी चावल की खीर ग्रहण कर उपवास तोड़ा था। खीर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दिया। भगवान बुद्ध ने किसानों को कालानमक धान का दाना देकर इसकी खेती करने की सलाह दी। कालानमक चावल का जिक्र चीनी यात्री फाह्यान के यात्रा वृतांत में भी मिलता है। यह चावल सुगंध, स्वाद और सेहत से भरपूर है। सिद्धार्थनगर का बर्डपुर ब्लॉक इसका गढ़ है। एक समय तक इसकी खेती का रकबा 10 हजार हेक्टेयर से भी कम रह गया था लेकिन राज्य सरकार के प्रयासों से यह बढ़कर 50 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है।