कोलकाता, 21 अक्टूबर | पश्चिम बंगाल को शक्ति की भूमि कहा जाता है। इसी वजह से यहां मां दुर्गा की आराधना विश्व प्रसिद्ध रही है। नारी शक्ति के सशक्तिकरण की प्रतीक देवी दुर्गा की आराधना भले ही राज्य में जोर-जोर से हो रही है लेकिन यहां कामदुनी में एक युवती की सामूहिक दुष्कर्म के बाद निर्मम हत्या के मामले में निचली अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए आरोपितों को हाई कोर्ट से बरी कर दिए जाने से पूजा का आनंद फीका नजर आ रहा है।
कामदुनी मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कामदुनी की याचिकाओं पर तत्काल रिस्पांस तो किया लेकिन आरोपितों पर महज चंद शर्तें लगाई हैं। इस बीच षष्ठी की सुबह एक बार फिर कामदुनी कांड में न्याय को हासिल करने के लिए मुहिम चलाने वाले मौसमी, टुम्पा, मास्टरमशाई और अन्य ग्रामीण एक बार फिर कामदुनी चौराहे पर एकत्र हुए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन के लिए बुलाया। एकमात्र शर्त थी कि बिना किसी पार्टी चिन्ह के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना है।
भाजपा महिला मोर्चा ने विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में कामदुनी में मार्च निकाला। हालांकि पार्टी के उस जुलूस में कामदुनी का कोई भी प्रदर्शनकारी नजर नहीं आया। कामदुनी विरोध मंच चाहता है कि सभी लोग पार्टी का रंग छोड़कर उनके आंदोलन में शामिल हों। उन्होंने विरोध जताने के लिए सत्ताधारी पार्टी तृणमूल को भी बुलाया था।
वारदात के 10 साल बीत गए हैं और राज्य के उच्च न्यायालय का फैसला न्याय के लिए संघर्ष करने वालों के लिए निराशाजनक साबित हुआ है। इसलिए इस दुर्गा पूजा से पहले आया यह फैसला महिषासुर मर्दिनी क्या आराधना के उत्साह पर भी दुख की साया की तरह मंडरा रहा है।
कामदुनी की प्रदर्शनकारी मौसमी कयाल ने कहा, इस बार दुर्गा पूजा में जो आनंद या मौज-मस्ती थी, वह नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले से मन का भरोसा उठ गया। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा था, लेकिन दोषियों पर केवल शर्तें लगाई गईं। वे सड़कों पर घूमेंगे। ऐसे तो न्याय न मिलने पर लोग कानून हाथ में लेने को मजबूर हो जाते हैं। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खुश नहीं हैं। जब तक दोषियों को कानूनी सजा नहीं मिल जाती, हमें शांति नहीं मिलेगी। न्याय की आशा में हमारी पूजा गुजर रही है।
कामदुनी के एक अन्य प्रदर्शनकारी टुम्पा कयाल ने कहा, हमने सभी राजनीतिक दलों से विरोध में शामिल होने की अपील की है। उन्हें राजनीतिक झंडा छोड़कर आने को कहा गया है। मैंने मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को भी आने को कहा है। हम आज यहां चिंतन में हैं। ये हमारा फैसला सोच समझकर लिया गया है। 10 साल लंबा आंदोलन चला। राज्य सरकार के दिखाए रास्ते पर चलने के बाद भी हमें न्याय नहीं मिला।
इस दिन कामदुनी के विरोध प्रदर्शन में भाजपा नेता शंकुदेव पांडा मौजूद थे। उन्होंने कहा, राजनीति से ऊपर हम कामदुनी कांड में न्याय का समर्थन करेंगे। विपक्ष के नेता ने हमें यहां भेजा है। हमें न्याय चाहिए, हम हर तरह से मदद करेंगे।