भाजपा उम्मीदवार बानेश्वर महतो को है अपनी और पार्टी की जीत का पूरा भरोसा

भाजपा उम्मीदवार बानेश्वर महतो को है अपनी और पार्टी की जीत का पूरा भरोसा

पुरुलिया, 27 मार्च । पुरुलिया के बलरामपुर से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बानेश्वर महतो जिले में अपनी और पार्टी की जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। बानेश्वर महतो का जन्म, शिक्षा, काम बलरामपुर में ही हुआ है। उन्हें इस बात का गर्व है कि वे वास्तव में यहां के भूमि पुत्र हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री से लेकर बड़े-बड़े नेताओं पर बाहर से आयातित उम्मीदवार होने के आरोप लग रहे हैं ऐसे में बानेश्वर महतो स्थानीय होने का हवाला देकर वोट मांग रहे हैं।

बानेश्वर महातो ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में बताया कि बलरामपुर ही नहीं, बल्कि पुरुलिया जिले की सभी नौ सीटों पर भाजपा चुनाव जीतेगी। किस आधार पर आप इतने आश्वस्त हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा, मैं लगभग पांच सालों तक पार्टी का जिलाध्यक्ष रहा। मैं अपने हाथ की हथेली की तरह पूरे जिले को जानता हूं। मैं आपको यह भी बता सकता हूं कि किस सीट पर कितने अंतर से जीतेंगे। उदाहरण के लिए, मैं अपनी विधानसभा सीट से 35-40 हजार वोटों से जीतूंगा। परिणाम घोषित होने के बाद मेरे दावे की पुष्टि कर लीजियेगा।

उन्होंने बताया कि 8वीं कक्षा से आरएसएस के स्वयंसेवक रहे हैं। वे संघ के आनुसांगिक संगठन कल्याण आश्रम के कार्यकर्ता के तौर पर अपनी सेवायें देते रहे हैं। उन्होंने बताया कि मैं फुलचंद हाई स्कूल से पास हुआ और तत्कालीन बिहार के एक कॉलेज में दाखिला लिया। पार्ट वन के बाद पढ़ना जारी नहीं रख सका। लेकिन 1991 से मैं भाजपा का पूर्णकालिक कार्यकर्ता हूं। मुझ पर कई बार हमले भी हुए हैं।

2011 और 2016 के विधानसभा चुनाव में बलरामपुर से बातूलाल महतो और सुभाष चंद्र दास भाजपा के उम्मीदवार थे। हालांकि दोनों बार भाजपा यहां तीसरे नंबर पर रही थी। दोनों चुनावों में तृणमूल के शांतिराम महतो विजयी हुए थे।

इस बार उम्मीदवार नही बनाये जाने पर बातूलाल और सुभाष ने कोई बगावत नही की? इसके जवाब में बानेश्वर ने कहा, वे दोनों तृणमूल कांग्रेस में चले गए हैं। साल 2018 के पंचायत चुनाव में हमने बातूलाल की बहू अंजना को जिताया। उसके बाद भी, उन्होंने अपने परिवार के साथ भाजपा छोड़ दी। असल में, तृणमूल कांग्रेस ने इन्हें विभिन्न तरीकों से मजबूर किया था।

आय के स्रोतों के बारे में पूछे जाने पर बानेश्वर ने कहा, मेरे पिता रेलवे में काम करते थे। प्रति माह 28 हजार रुपये पेंशन मिलती है। लगभग 22 बीघा जमीन पर खेती होती है। पत्नी आईसीडीएस में कार्यरत है। कुल मिला कर अच्छे से चल जाता है। पार्टी के संगठन के काम पर मेरा पूरा ध्यान है। पिछले लोकसभा चुनाव में पुरुलिया में सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा आगे थी। मुझे उम्मीद है कि हम अगले चुनाव में भी सफलता की इस निरंतरता को बनाए रख सकते हैं।