बीकानेर में मुद्राशास्त्र और संग्रहालय संरक्षण पर राष्ट्रीय कार्यशाला

बीकानेर में मुद्राशास्त्र और संग्रहालय संरक्षण पर राष्ट्रीय कार्यशाला

बीकानेर, 22 नवंबर । सेंटर फॉर म्यूज़ियम एंड डॉक्युमेंटेशन के बैनर तले विश्व धरोहर संरक्षण सप्ताह के अंतर्गत एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।

आयोजन सचिव सेंटर की डाइरेक्टर डॉ मेघना शर्मा ने बताया कि उक्त कार्यशाला इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मुद्राशास्त्र व संग्रहालय संरक्षण पर आयोजित की गई जिसमें जयपुर के पुरातत्व व संग्रहालय विभाग के पूर्व उत्खनन अधीक्षक डॉ ज़फर उल्लाह ख़ान ने बीज वक्ता की भूमिका का निर्वहन करते हुये भारत की प्राचीन मुद्राओं को पहचानने, उनकी लिपि को पढ़ने व संग्रहालयों में उनके प्रदर्शन की तकनीक को लेकर मुख्य रूप से अपना उद्बोधन दिया।

उद्घाटन समारोह के बाद कार्यशाला में दो तकनीकी सत्र रखे गये जिसमें उन्होंने बताया कि कि हम जितना प्रकृति के नज़दीक रहेंगे उतने ही अधिक स्वस्थ होंगे। आपने बताया कि मुद्राओं का डिजिटलाईजेशन किया गया है जिसकी प्रक्रिया के तहत मालूम पड़ा कि भिन्न भिन्न काल के सिक्कों पर शिवलिंग, नृत्य करते हुये शिव, खरगोश, कोबरा, हाथी, चूहे, गेहूं की बालियों व सूर्य जैसी प्राकृतिक अवयवों का अंकन मिलता है। ज़फर उल्लाह ख़ान द्वारा कालीबंगा में भगवान राम की आकृति वाले टेराकोटा सिक्कों की खोज की गई। विद्यार्थियों में से खुशबू तेजी, मनोज मीणा, पवन सारस्वत व गौतम आचार्य ने तकनीकी सत्रों में विषय विशेषज्ञ से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं को प्रकट किया व संबद्ध विषय पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो अनिल कुमार छंगाणी ने स्वागत उद्बोधन देते हुये बताया कि सिक्के भी निहित आकृतियों के माध्यम से सदियों से पर्यावरण संरक्षण के संदेश देते आयें हैं।

राष्ट्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुयें कुलपति प्रो विनोद कुमार सिंह ने कहा कि समय आ गया है कि अब हम अपनी प्रकृति और प्राचीन धरोहर को संरक्षित रखने के लिए तत्पर हों नहीं तो विश्व को भविष्य में भी कोरोना जैसी विपदाएं भुगतनी पडेंगी।