​रायपुर : जंगली हाथियों से बचाव के लिए वन विभाग ने जारी की एडवाईजरी

​रायपुर : जंगली हाथियों से बचाव के लिए वन विभाग ने जारी की एडवाईजरी

रायपुर, 17 नवंबर । वन विभाग हाथियों से आमजन की सुरक्षा के लिए अलर्ट मोड पर काम कर रही है। इसी कड़ी में कबीरधाम जिले के आदिवासी बैगा बाहुल बोड़ला विकासखंड के अंतिम गांव में बुधवार को जंगली हाथियों के दल विचरण की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के निर्देश पर वन अमला हाई अलर्ट हो गया है। कबीरधाम कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा के निर्देश पर वन विभाग द्वारा जंगली हाथियों की धमक को देखते हुए आम जनता के जान-माल की सुरक्षा के लिए एडवाईजरी जारी की है।

वनमंडलाधिकारी दिलराज प्रभाकर ने बुधवार सुबह बोड़ला विकासखंड के अंतिम प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। ग्रामीणों से भेंट कर उन्होंने जंगली हाथियों द्वारा किसानों के खेतों में पहंचाई गई क्षति का मुआयना किया गया। प्रभावित किसानों को वन विभाग द्वारा तत्कालिक सहायाता राशि दी गई। डीएफओं ने बताया कि सर्वे के बाद प्रभावित किसानों को नियमानुसार आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। वन मण्डलाधिकारी ने हाथी के आने पर क्या करें और क्या न करें उप शीर्षक से जारी सलाह में लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की है। वन मंडलाधिकारी द्वारा आमजनों की सुविधा के लिए अधिकारियों के मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं और मुख्यालय में कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। विभाग द्वारा आमजनों से अपील करते हुए कहा गया है कि जंगली हाथियों से कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाकर रखें और जंगली हाथियों की फोटो और सेल्फी नहीं ले।

वन मंडलाधिकारी ने बताया कि वन अमले द्वारा कबीरधाम जिले के अंतिम गांव से कुछ दूरी पर मध्यप्रदेश की सीमा क्षेत्र में 14 सदस्यीय जंगली हाथियो को देखा गया है। बांधी गांव के किताब पिता चमारु गोंड का 3 एकड़, चंद्रपति पिता लखन यादव का आधा एकड़, गजपति पिता लखन यादव का आधा एकड़ रक्बा हाथियों के द्वारा रौंदा गया है। जिसमें धान की फसल लगी थी। वहीं रामचरण पिता भादू बैगा की आधा एकड़ की कटी हुई धान की फसल में से कुछ को हाथियों का दल चराई करके गया है।

डीएफओ प्रभाकर ने बताया कि वन अपराध संबंधित सूचना प्राप्त होने पर जिला कबीरधाम का जागरूक नागरिक वन विभाग को सूचित कर वन अपराध से बचाव एवं नियंत्रण में शासन का सहयोग कर सकता है। यदि किसी कारणवश वन विभाग से संपर्क नहीं हो पाता है, तो तत्काल स्थानीय थाना या पुलिस चौकी में सूचना दी जा सकती है। हाथी द्वारा नुकसान पहुंचाने पर वन विभाग द्वारा क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। मृत्यु होने की स्थिति में 6 लाख , स्थाई रूप से अंग भंग होने की स्थिति में 2 लाख , घायल होने पर इलाज कराने पर प्रस्तुत बिल के आधार पर अधिकतम 59 हजार 100 रुपये तक, पशु हानि पर अधिकतम प्रति पशु 30 हजार तक, फसल नुकसानी पर फसल का मूल्यांकन कर अधिकतम 10 हेक्टेयर तक की फसल नुकसानी की नियमानुसार क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।