14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए पार्थ और अर्पिता

14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए पार्थ और अर्पिता

कोलकाता, 05 अगस्त। पश्चिम बंगाल में शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथों गिरफ्तार ममता सरकार के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस बीच जेल में जाकर ईडी के दो अधिकारी उनसे आवश्यकता पड़ने पर पूछताछ भी कर सकते हैं। स्कूल सेवा आयोग नियुक्ति घोटाले में धन शोधन की जांच के संबंध में शुक्रवार को यहां बैंकशाल कोर्ट की विशेष पीएमएलए अदालत में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को फेस करने के बाद ईडी ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत का अनुरोध किया था। हालांकि इनके अधिवक्ताओं ने जमानत की अर्जी लगाई थी लेकिन दोनों पक्षों में बहस के दौरान ईडी के अधिवक्ता ने कहा कि उनके पास से भारी मात्रा में नकदी और गैर कानूनी चीजें मिली हैं, इसलिए उन्हें जमानत देने पर साक्ष्यों को मिटाया जा सकता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया है।

ईडी के अधिवक्ता ने मामले में नए खुलासे को लेकर जेल में दोनों आरोपितों से पूछताछ करने के लिए अदालत की अनुमति के लिए भी आग्रह किया। धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत के न्यायाधीश जीवन कुमार साधु ने मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

पार्थ और अर्पिता को गत 23 जुलाई को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की अवैध नियुक्तियों में शामिल कथित धन शोधन की जांच के संबंध में ईडी के हाथों गिरफ्तार किया गया था। चटर्जी की जमानत के लिए अनुरोध करते हुए उनके अधिवक्ता ने कहा कि अब वह एक सामान्य व्यक्ति हैं और फरार नहीं होंगे। चटर्जी के वकील ने कहा कि वह अब प्रभावशाली व्यक्ति नहीं हैं और अपनी विधायकी छोड़ने पर भी विचार करने को तैयार हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चटर्जी को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया है जबकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पार्टी के सभी पदों से हटा दिया है। ईडी ने दावा किया कि चटर्जी की हिरासत में 15 दिन में से कम से कम दो दिन यहां के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती होने के कारण बर्बाद हो गए।

चटर्जी को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर चिकित्सीय जांच के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भुवनेश्वर भेजा गया था और वहां के चिकित्सकों ने कहा था कि उन्हें तत्काल भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। ईडी ने दावा किया है कि उसने मुखर्जी के फ्लैट से 49.8 करोड़ रुपये नकदी, भारी मात्रा में गहने और सोना की छड़ों के साथ संपत्तियों और दोनों आरोपियों के संयुक्त स्वामित्व वाली एक कंपनी के दस्तावेज बरामद किए हैं। ईडी ने सुनवाई के दौरान यह भी बताया कि पूछताछ में पार्थ चटर्जी कतई सहयोग नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने खुद को और अर्पिता को भी पहचानने से इनकार किया है।