संबंधों का व्याकरण गढ़ते हैं गोस्वामी तुलसीदास

संबंधों का व्याकरण गढ़ते हैं गोस्वामी तुलसीदास

कोलकाता, 25 अगस्त । संत्रस्त समाज को शरण देता है तुलसी का साहित्य। उसमें बिखरते समाज को जोड़ने के सूत्र समाहित हैं। संबंधों के व्याकरण को गढ़ा गोस्वामी तुलसीदास ने। अपनी कालजयी कृतियों के कारण वे सदैव प्रासंगिक रहेंगे। उपरोक्त बातें दिल्ली विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष एवं साहित्य अकादमी की उपाध्यक्ष प्रो. कुमुद शर्मा ने सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय की ओर से आयोजित तुलसी जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कही। कुमुद शर्मा ने कहा कि गांधी के स्वराज का सपना रामचरितमानस के आधार पर ही निर्मित हुआ था। उन्होंने तुलसी के नारी पात्रों के सकारात्मक पक्षों का विवेचन किया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आई.पी.एस. डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सच्ची लगन से लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। चंद्रयान३ की सफलता इसका सबसे ताजा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राम कृपा के साथ परिश्रम की भी आवश्यकता है। डॉ० राजेश कुमार ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन के भावपूर्ण प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समारोह के आरम्भ में सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय की छात्राओं ने मंगलाचरण जय राम रमा रमनं शमनं का समूह गायन प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत प्रो. राजश्री शुक्ला, सगरमल गुप्त, अनुराधा जालान, दिव्या जालान एवं विश्वभर नेवर ने किया। स्वागत भाषण दिया संयोजक डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने । समारोह का संचालन किया पुस्तकालय की मंत्री दुर्गा व्यास ने तथा पुस्तकालय के अध्यक्ष भरत कुमार जालान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में महावीर बजाज, अरुण प्रकाश मल्लावत, डॉ. कमलेश पाण्डेय, प्रेम शर्मा, डॉ० तारा दूगड़ सहित महानगर के प्रतिष्ठित साहित्यकार और विभिन्न महाविद्यालयों, विद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और तुलसी प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।