चुनौती और आम लोगों की उम्मीद पर खड़ा उतरना है पुलिस का कर्तव्य : डीआईजी

चुनौती और आम लोगों की उम्मीद पर खड़ा उतरना है पुलिस का कर्तव्य : डीआईजी

बेगूसराय, 17 अप्रैल । बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस आठवीं वाहिनी का स्थापना दिवस सोमवार को समारोह पूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में बेगूसराय-खगड़िया प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) बाबूराम एवं समादेष्टा हृदय कांत ने परेड की सलामी ली तथा बेहतरीन कार्य करने वाले 13 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया।

समारोह को संबोधित करते हुए डीआईजी बाबूराम ने कहा कि पुलिस का काम आज के परिप्रेक्ष्य में बहुत ही चुनौतीपूर्ण होते जा रहा है। आमजनों को हम लोगों से बहुत अपेक्षाएं हैं, उनकी उम्मीदें बढ़ रही है। इसके लिए हम लोगों को लगातार प्रोफेशनल तरीके से अपने काम करने की शैली तथा शारीरिक और मानसिक फिटनेस को उन्नत करने की जरूरत है। इस वाहिनी का अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर एक अवसर है खुद को फिट रखने का।

पुलिस उप-महानिरीक्षक ने कहा कि आज ही के दिन 1964 में इस वाहिनी की स्थापना पटना में की गई थी। तब से लेकर आज तक इस वाहिनी ने बहुत सारे चुनौतीपूर्ण अवसरों पर अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है। राज्य से बाहर जम्मू-कश्मीर में भी ड्यूटी दी गई तो वहां भी बहुत ही अच्छे तरीके से ड्यूटी का निर्वहन किया है।

समारोह को संबोधित करते हुए बीएसएपी-आठ के समादेष्टा हृदय कांत ने वाहिनी की स्थापना और उद्देश्य के साथ-साथ कर्तव्यों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस वाहिनी के जवान को जम्मू कश्मीर के अलावा भारत-पाकिस्तान के युद्ध के समय भी ड्यूटी लगाया गया था। उस समय इस वाहिनी के जवान ने जो अनूठा उदाहरण पेश किया था, वह अमूल्य है।

इस अवसर पर डीआईजी बाबूराम और समादेष्टा हृदय कांत ने कर्तव्यों का बेहतर निर्वहन करने वाले अनिस जनार्दन मांझी, हवलदार अशफाक खां, सिपाही मुकेश कुमार, सृष्टि सुमन, पारस कुमार मिश्रा, अभिषेक कुमार, बृजेश कुमार, राजीव कुमार, अनुज ठाकुर, चंदन कुमार, मुन्ना कुमार एवं विभा कुमारी तथा लिपिक नमिता कुमारी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

इससे पहले डीआईजी बाबूराम एवं समादेष्टा हृदय कांत ने प्रथम परेड कमांडर इंस्पेक्टर संजय कुमार के नेतृत्व में परेड का निरीक्षण किया तथा झंडोत्तोलन कर झंडे को सलामी दी। वहीं, शहीद स्थल पर पुष्पांजलि कर अमर शहीद जवानों को सलामी दी गई तथा पौधारोपण किया। स्थापना दिवस समारोह का समापन गुब्बारा मुक्त गगन में उड़ाकर किया गया।