बांग्लादेश: कट्टरपंथियों के निशाने पर रहा है अल्पसंख्यक समाज, रिपोर्ट से खुलासा

बांग्लादेश: कट्टरपंथियों के निशाने पर रहा है अल्पसंख्यक समाज, रिपोर्ट से खुलासा

-नौ वर्षों में हर साल औसतन 413 हमले हुए

-पांच साल में सर्वाधिक खराब रहा वर्ष 2021

-2014 में सबसे अधिक लोग हुए थे शिकार

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर । बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। करीब 16 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में 10 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी है, जिनमें सबसे अधिक 8-9 प्रतिशत आबादी हिंदू समुदाय की है। पिछले नौ वर्षों में यही अल्पसंख्यक समुदाय देश में सक्रिय कट्टरपंथी समूहों का बार-बार निशाना बनता रहा है।

बांग्लादेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ढाका ट्रिब्यून ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर ब्यौरेवार बताया है कि बांग्लादेश में पिछले नौ साल किस तरह अल्पसंख्यक समूहों के लिए बर्बरता के साल के रूप में याद किये जाएंगे। जाने-माने अधिकार समूह आईन-ओ-सालिश केंद्र के मुताबिक जनवरी 2013 से इस साल सितंबर माह तक नौ साल में हिंदू अल्पसंख्यकों से जुड़े मंदिरों, घरों और उनके प्रतिष्ठानों पर 3721 हमले किये गए। हर साल औसतन 413 हमलों ने बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना को लगातार मजबूत किया है।

एक ऑनलाइन प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इन नौ वर्षों में किये गए कम-से-कम एक हजार, 678 मामले, कट्टरवादी समूहों द्वारा हिंदू मंदिरों-मूर्तियों, पूजा स्थलों में की गयी तोड़फोड़ से जुड़े हैं। साथ ही पिछले तीन साल में 18 हिंदू परिवार ऐसे हमलों के शिकार हुए हैं। हालांकि हालात सुधरते दिखे लेकिन पिछले पांच साल में 2021 सबसे घातक साल रहा। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आंकड़े सही तस्वीर पेश नहीं करते और मीडिया के जरिये केवल बड़े मामले प्रकाश में आते हैं। विभिन्न समुदायों के बीच इससे आपसी अविश्वास लगातार बढ़ने का खतरा है।

एएसके के मुताबिक जनवरी 2013 से इस वर्ष 30 सितंबर तक अल्पसंख्यक समूह पर किये गए हमलों में मंदिर, मठ और मूर्तियां खासतौर पर निशाने पर रहीं। ऐसे मामलों की संख्या 45.11 प्रतिशत रही, जबकि 42.35 मामलों में अल्पसंख्यक समूह के लोगों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गयी। ऐसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के स्वामित्व वाले व्यापार केद्रों पर किए गए हमलों का प्रतिशत 11.82 रहा और 0.72 प्रतिशत घटनाएं धार्मिक अल्पसंख्यकों की जमीन हड़पने की हैं।

इन नौ वर्षों में सबसे खराब स्थिति 2014 में बनी थी, जब एक हजार, 201 अल्पसंख्यक घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं। 2016 में हिंसा और तोड़फोड़ के ऐसे मामलों की संख्या 300 के करीब थी। इन नौ साल में सबसे अधिक मौत 2016 में हुई थी, जब अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर किए गए हमलों में सबसे ज्यादा नौ लोगों की जान चली गयी। एएसके के मुताबिक इस वर्ष सितंबर के अंत तक देश के हिंदू अल्पसंख्यकों के 196 घरों, दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों एवं मूर्तियों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं। इन हमलों में सात लोग घायल हुए।

हालांकि अक्टूबर माह में हिंदू अल्पसंख्यकों के सामने तब और खराब स्थिति पैदा कर हो गई, जब कोमिला में एक अफवाह के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े स्तर पर अल्पसंख्यक हिंदुओं और उनसे जुड़े आस्था स्थलों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाने लगा। इन घटनाओं में छह लोगों की मौत हो चुकी है। बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन युनिटी काउंसिल का दावा है कि इन घटनाओं में 70 लोग घायल हुए और 130 घरों, दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों में तोड़फोड़ की गयी। संगठन के महासचिव एडवोकेट राना दास गुप्ता ने दो दिन पहले ही रविवार को चटगांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इन हमलों में छह लोगों की मौत हुई है लेकिन पुलिस की तरफ से अबतक मरने वालों की संख्या नहीं बतायी गयी है।