पूर्व सैनिक अपने अनुभव और ज्ञान राष्ट्रनिर्माण तथा समाज के कल्याण में लगायें : राज्यपाल गुरमीत सिंह

पूर्व सैनिक अपने अनुभव और ज्ञान राष्ट्रनिर्माण तथा समाज के कल्याण में लगायें : राज्यपाल गुरमीत सिंह

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर । उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को कहा कि पूर्व सैनिकों को अपना अनुभव तथा ज्ञान राष्ट्रनिर्माण तथा समाज की भलाई में लगाना चाहिए। कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, ईमानदारी जैसे गुणों से युक्त सैनिक स्वभाविक नेतृत्वकर्ता है। उन्हें चाहिए कि वह लोगों को राष्ट्र निर्माण और जनहित के कार्यों से जोड़ें।

राज्यपाल गुरमीत सिंह सोमवार को कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में राष्ट्रीय सैनिक संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समर्पित सदस्यों के अथक प्रयासों से ही राष्ट्रीय सैनिक संस्था युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने, शहीदों के परिवारों की मदद करने, पूर्व सैनिकों के कल्याण तथा विभिन्न सामाजिक बुराइयों को खत्म करने जैसे महान लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हो रही है।

राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को स्कूलों, कॉलेजों में ही राष्ट्रनिर्माण व समाज सेवा के कार्यों के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। सभी नागरिकों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 में वर्णित मूल कर्तव्यों को अवश्य पढ़ना चाहिए तथा उनका निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तपोभूमि, सैन्य धाम उत्तराखण्ड का राज्यपाल बनना उनके लिए गर्व का विषय है। उत्तराखण्ड देश की रक्षा सेवा में 18 प्रतिशत से अधिक योगदान दे रहा है। प्रत्येक परिवार से कम से कम एक व्यक्ति सेना में हैं। यहां गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे चार पवित्र धाम, सिक्ख गुरुओं के पवित्र स्थल हैं। यह गुरु गोबिन्द सिंह की तपोभूमि भी है, जो एक सैनिक, सन्त तथा विद्वान थे। उत्तराखण्ड में रिवर्स माईग्रेशन के लिए कार्य किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) पीके सहगल, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. विपिन बक्शी, विंग कमांडर(सेवानिवृत्त) प्रफुल्ल बक्शी, कर्नल टी पी त्यागी, मेजर सुशील गोयल एच एच आचार्य डॉक्टर लोकेश मुनि, राजेन्द्र बगासी व अन्य गण्यमान्य उपस्थित थे।