‘देववाणी संस्कृत के संवर्धन के लिए अवसरों की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी’

‘देववाणी संस्कृत के संवर्धन के लिए अवसरों की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी’

उदयपुर, 21 जून । देववाणी संस्कृत का संरक्षण भी जरूरी है और संवर्धन भी। इसके लिए संस्कृत में अवसरों की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास करने होंगे, तभी छात्र संस्कृत के प्रति रुचि लेंगे और यही रुचि हमारे प्राचीन ग्रंथों के शोध को भी बढ़ावा दे सकेगी जिससे हमारे शास्त्रों में छिपा हुआ ज्ञान पुनः लोकजीवन में समाहित हो सकेगा।

यह बात रविवार को यहां संस्कृत भारती चित्तौड़ प्रांत के दस दिवसीय निःशुल्क ऑनलाइन संस्कृत संभाषण शिविर के समापन पर उभर कर आई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उदयपुर सांसद अर्जुन मीणा ने शिक्षार्थियों को प्रोत्साहित किया व देववाणी के संरक्षण के लिए संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अपनी ओर से संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव प्रयासों का आश्वासन भी दिया।

समारोह के मुख्य वक्ता संस्कृत भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री हुल्लास चंद्र ने कहा कि संस्कृत संभाषण करने वालों की संख्या को बढ़ाना होगा साथ ही उन्हें संगठित भी करना होगा। इससे संस्कृत का वातावरण अनुकूल बनेगा और समाज उसके महत्व को समझकर अनुसरण भी कर सकेगा। उन्होंने संस्कृत भारती के प्रकल्पों साप्ताहिक मेलन, संभाषण वर्ग, गृहं गृहं संस्कृतं, संस्कृत संवाद शाला, सरल संस्कृत परीक्षा आदि के माध्यम से संस्कृत भारती के कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्व के 29 देशों में निरंतर संस्कृत भारती संस्कृत के प्रचार प्रसार का कार्य होकर कर रही है।

समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भगवती शंकर व्यास ने कहा कि संस्कृति का संरक्षण संस्कृत में ही निहित है। उन्होंने इस भाषा को सामान्य बोलचाल की भाषा बनाने व यूपीएससी-आरपीएससी आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में संस्कृत को आरक्षित स्थान देने की जरूरत बताई ताकि अधिक से अधिक संस्कृत को अपना विषय बनाएं।

संस्कृत संभाषण वर्ग के मुख्य शिक्षक मीठालाल माली ने बताया कि वर्ग में 239 पंजीकरण हुए। प्रतिदिन अपना नाम बोलना सीखने से लेकर गीत, खेल, चुटकुले, मंत्र, श्लोक, संस्कृत में बोलचाल, व्यवहार आदि का प्रशिक्षण दिया गया।

महानगर प्रचार प्रमुखा रेखा सिसोदिया ने बताया समारोह का शुभारंभ रेणु पालीवाल के दीप मंत्र से तथा नरेंद्र शर्मा के ध्येय मंत्र से हुआ। प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा ने अतिथियों का स्वागत परिचय कराया। इस अवसर पर संभाषण वर्ग में लाभान्वित हुए शिक्षार्थी के रूप में बांसवाड़ा से जयेश उपाध्याय, अंग्रेजी माध्यम में पढ़ रहे कक्षा-6 के आरव, कंचन मीणा व कल्पना तिवारी ने शिविर का अनुभव संस्कृत में संभाषण कर प्रस्तुत किया।