गहलोत सरकार : मंत्री और सलाहकार के बाद अब 15 संसदीय सचिव बनाने की तैयारी

गहलोत सरकार : मंत्री और सलाहकार के बाद अब 15 संसदीय सचिव बनाने की तैयारी

जयपुर, 23 नवंबर । गहलोत सरकार के नए चेहरे का गठन होने के बाद अब मंत्री बनने से वंचित रहे विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर संतुष्ट करने की तैयारी की जा रही है। बहुजन समाज पार्टी से कांग्रेस में आए विधायकों और तीन से चार निर्दलीय तथा पांच से सात कांग्रेस विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने के आसार हैं। कांग्रेस हाईकमान से संसदीय सचिवों के नामों पर मंजूरी मिलते ही इनकी नियुक्ति की घोषणा हो सकती है। अभी संख्या तय नहीं है। अनुमान के अनुसार 15 के आसपास संसदीय सचिव बनाए जाने की चर्चा है।

गहलोत कैबिनेट में मंत्रियों की खाली जगह पूरी कर दी गई है। जगह कम होने से सभी दावेदारों को मंत्री नहीं बनाया जा सका है। बसपा से कांग्रेस में आने वाले, निर्दलीय और गहलोत समर्थक कुछ कांग्रेस विधायकों को अब संसदीय सचिव बनाकर संतुष्ट करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। मंत्रिमंडल फेरबदल में जिलों को पूरा प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। राज्य में 14 जिले ऐसे हैं, जहां से कांग्रेस विधायक होते हुए भी एक भी मंत्री नहीं बनाया गया है। अब संसदीय सचिव बनाकर या बोर्ड-निगम में राजनीतिक नियुक्तियां देकर सियासी पावर बैलेंस किया जाएगा। संसदीय सचिवों को मंत्रियों के अंडर में विभाग दिए जा सकते है।

जानकारों की राय में संसदीय सचिवों में सचिन पायलट समर्थक विधायकों को भी शेयरिंग फॉर्मूले के हिसाब से जगह मिलेगी। गहलोत कैंप के विधायक ज्यादा होंगे। पहली बार विधायक बनने वालों को ज्यादा मौका मिलेगा। पिछले साल बगावत के समय पायलट समर्थक विधायक राकेश पारीक को सेवादल अध्यक्ष और मुकेश भाकर को यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया था। अब दोनों को एडजस्ट किया जा सकता है।

इसमें इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि जिन जिलों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है उस जिले को प्रतिनिधित्व मिल जाए. ऐसे में पायलट कैंप हो, गहलोत कैंप हो, चाहे बसपा से कांग्रेस में आए विधायक, क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए ही संसदीय सचिव बनाए जाएंगे।

राजस्थान में मंत्रिमंडल पुनर्गठन और रिशफलिंग के बाद अब प्रदेश कांग्रेस संगठन में विस्तार की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि दिसंबर में सरकार के तीन साल पूरे होने से पहले अधिकांश नियुक्तियां कर दी जाएंगी। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा दो दिन दिल्ली दौरे पर रहेंगे। मंत्री पद छोड़ने के बाद वे पहली बार दिल्ली जा रहे हैं।

संगठन में होने जा रही नियुक्तियों में पार्टी के कई नाराज नेताओं-कार्यकर्ताओं को एडजस्ट किया जाएगा। डोटासरा दिल्ली में प्रदेश प्रभारी अजय माकन से पीसीसी कार्यकारिणी के विस्तार, जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्तियों पर चर्चा करेंगे। जिला और ब्लॉक अध्यक्ष के बाद उनकी कार्यकारिणी भी बनाई जाएगी। इन नियुक्तियों के जरिए हजारों कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं को पद और सम्मान दिया जाएगा, ताकि दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय किया जा सके।

प्रदेश प्रभारी अजय माकन की जयपुर में सीएम अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा के साथ बैठकर भी संगठन पर चर्चा हुई है। अब डोटासरा और अजय माकन राजस्थान से तैयार संगठन की लिस्ट को मंजूरी दिलाने के लिए राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को सौंपेंगे। पूर्व डिप्टी सीएम और पीसीसी चीफ रहे सचिन पायलट अपने खेमे के नेताओं काे पीसीसी और जिलों की कार्यकारिणी में भी एडजस्ट करना चाहते हैं। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान पायलट से भी चर्चा कर सकता है।

कांग्रेस आलाकमान ने सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को महंगाई और पेट्रोलियम की बढ़ी कीमतों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ धरने-प्रदर्शन का टास्क दिया है। तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद कांग्रेस किसान आंदोलन में किसानों की मौत और अब तक हुए नुकसान का मुद्दा भी उठा रही है। इसे केंद्र सरकार की बड़ी विफलता के तौर पर जनता में भुनाने की प्लानिंग भी है। केंद्र की मोदी सरकार के 7 साल से ज्यादा के कार्यकाल की विफलता जनता के बीच ले जाने की तैयारी कांग्रेस पार्टी की ओर से की जा रही है। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए राज्य में बड़े लेवल पर आंदोलन और धरने-प्रदर्शन के कार्यक्रमों को रोड मैप भी तैयार किया जा रहा है।