हरदोई, 25 मई । ज्येष्ठ माह की गर्मी में सिद्ध महावीर मंदिर का प्रांगण आस्था के सैलाब में उस समय डूब सा गया जब वट बृक्ष के नीचे बर्फ की सिल्लियों के ऊपर लगभग डेढ़ घंटे से भी अधिक समय तक नेरी नेवादा बाला जी मंदिर के महन्त अशोकानन्द महाराज ने लोक कल्याण के लिए साधना की। गुरूवार को साधना के दौरान भजन, कीर्तन का दौर चलता रहा। इस दौरान भक्ति भाव एवं अध्यात्म से सराबोर भक्त गण ताली बजा बजाकर भजन कीर्तन का रसपान करते हुये स्वयं भी गुनगुनाते रहे। आरती के उपरांत महंत ने यज्ञ कर लोककल्याण एवं प्राणियो में सद्भाव के लिए कामना की।
अशोकानन्द महाराज के आगमन से पूर्व ही कार्यक्रम के आयोजक विजय राठौर, सर्वेश कुमार गुप्ता उर्फ डब्बू, सुरकुट्टी लाल गुप्ता, जगदीश अरोडा उर्फ कुन्नी, विमलेश गुप्ता, दिलीप गुप्ता (दिल्ली बाले)राकेश गुप्ता उर्फ मंगू (सभासद प्रतिनिधि) ,रिंकू त्रिपाठी (पुजारी) सहित तमाम लोग महन्त की अगवानी एवं स्वागत के लिए रेलवे स्टेशन के निकट पिहानी रोड पर पहुंच गए जहां महंत का फूल मालाओं से स्वागत किया गया । नगर की सीमा से साधना स्थल तक कई जगह महंत का गर्मजोशी के साथ फूल मालाओ से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम स्थल पर जैसे ही महंत जी हाथ में शिवलिंग लेकर कार से उतरे तभी उपस्थित जनसमुदाय ने जयकारों से माहौल को अध्यात्ममय कर दिया तथा उनका स्वागत करने एवं एक झलक पाने के लिए होड लग गयी। अपना आसन लगाने से पूर्व बर्फ पर ही शिवलिंग को स्थापित किया तथा चिमटा गाडकर एवं शंखनाद कर अपनी साधना में लीन हो गये।
उल्लेखनीय है कि अशोकानन्द महाराज ने लोक कल्याण के लिए ग्यारह स्थानों पर बर्फ की सिल्लियों पर विराजमान होकर साधना करने का संकल्प लिया है अब तक वह चार स्थानों पर साधना कर चुके हैं इससे पूर्व वह हरियांवा, मितौली, तथा पिहानी में भी इस प्रकार से साधना कर चुके हैं।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के ब्रह्माबली नरनी गांव के निवासी सुन्दर लाल के पुत्र अशोक को बचपन से ही अध्यात्म में काफी रुचि थी। बताया जाता है कि अशोक काफी बीमार रहते थे । विस्तर पर पडे रहने के चलते उनकी पीठ मे छाले (वेडसोर) पड़ गये थे। लगभग 17 वर्ष की उम्र मे 3 जुलाई 2010 को स्वप्न में उन्हें बाला जी ने दर्शन देकर बताया कि उनके नेरी नेवादा ग्राम स्थित खेत मे जमीन के नीचे मूर्तिया दबी है उन्हें निकालकर मंदिर का निर्माण कराने का निर्देश दिया। जब अशोक ने स्वप्न मे बताये स्थान पर खुदाई करायी तब वास्तव मे मूर्तियां निकली तभी से अशोक का अशोकानन्द महंत के रूप मे उदय हो गया। महंत ने नेरी नेवादा मे उस स्थान पर बाला जी महाराज का मंदिर बनबाया उसके उपरांत सीतापुर जनपद के पथरी ग्राम मे भी बालाजी का मंदिर बनबाया। महंत किसी से पैसे नही लेते और न ही किसी को पैर छूने देते।