बांदा से बालू की पहली खेप मालगाड़ी से राजस्थान रवाना

बांदा से बालू की पहली खेप मालगाड़ी से राजस्थान रवाना

बांदा । पुलिस प्रशासन सफेदपोश और पत्रकारों के लिए कमाई का जरिया बन चुकी बांदा की बालू अब उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी रेलवे के जरिए भेजी जाएगी। इसकी शुरुआत आज भरतपुर राजस्थान एक खेप भेज कर दी गई है।

इस बारे में जानकारी देते हुए स्टेशन प्रबंधक बांदा कृष्ण कुशवाहा ने बताया कि बांदा स्टेशन में आज से ट्रेन के माध्यम से बालू भेजने का कार्य शुरू किया गया। बंगाली बाबू आगरा की फर्म ने आज 21 बॉक्स बालू लोड करा कर भरतपुर के लिए भेजा है। बालू की खेप भेजने से पहले पूजा पाठ किया गया और उसके बाद गाड़ी को रवाना किया।

उन्होंने बताया कि बालू ट्रेन के माध्यम से भेजे जाने से रेलवे की आमदनी में वृद्धि के साथ-साथ अवैध खनन में भी रोक लगेगी। साथ ही ओवरलोडिंग से भी निजात मिलेगी। इसका भविष्य में कई शहरों के लिए बालू लोड कर भेजने का प्लान है। मालगाड़ी को रवाना करते समय स्टेशन प्रबंधक के अलावा पीके सिंह यातायात निरीक्षक, संजय कुमार मुख्य वाणिज्य निरीक्षक, सुरेश मिश्रा मुख्य मार्ग और गोदाम पर्यवेक्षक एवं लोडिंग करने वाली पार्टी के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

बताते चलें कि बांदा जनपद में केन नदी, यमुना, बागैन नदियों में बालू का खनन किया जाता है। साल दर साल खनन में जहां इजाफा हो रहा है वहीं, प्रदेश सरकार को रॉयल्टी के रूप में हर साल अरबों रुपये मिल रहे हैं खदानों के पट्टे हथियाने के लिए देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां कूद रही है। वही, अवैध खनन में जहां खनिज विभाग के अधिकारी मालामाल हो रहे हैं साथ ही स्थानीय पुलिस भी अवैध कमाई में लिप्त है। यही नहीं स्थानीय पत्रकार भी बालू की कमाई से मालामाल हो रहे हैं। रेलवे से बालू की ढुलाई होने से कंपनियों को बिचैलियों में जो पैसा खर्च करना पड़ता था, उससे उन्हें राहत मिलने की आशा है।

बताया जाता है कि प्रतिस्पर्धा में रॉयल्टी की दर 10 गुना तक बढ़ गई है। हजारों ट्रक रोजाना बांदा और हमीरपुर जिले की खदानों से पूरे प्रदेश में बालू ले जा रहे हैं। ओवरलोड और अवैध खनन की भरमार है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कई बार इस पर जांच और कार्रवाई के आदेश दे चुका है। सीबीआई जांच भी चल रही है, लेकिन राजस्व जुटाने की होड़ में नदियों से वैध और अवैध खनन नहीं थम रहा।

रेलवे ने बुंदेलखंड की बालू भाड़े पर दूसरे प्रांतों में पहुंचाने के लिए अनुबंध किया है। इसकी शुरुआत बांदा रेलवे स्टेशन से हो रही है। यहां भारी मात्रा में बालू डंप की गई है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक हर एक रैक में लगभग 70 टन बालू लोड होगी। मालगाड़ी से बालू ढुलान और परवान चढ़ सकती है। रेलवे से ढुलान में ओवरलोडिंग और सड़कों को नुकसान पहुंचने की शिकायतों में भी कमी आएगी। साथ ही ट्रकों की तुलना में रेलवे रैक में बालू की मात्रा ज्यादा लोड हो सकेगी।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक एक रैक में लगभग 70 टन बालू लोड की जाएगी। ट्रकों के मुकाबले रेलवे रैक में बालू लगभग दोगुना लोड होगी। आमतौर पर 10 टायरा ट्रक में 30 घन मीटर के आसपास बालू लोड की जाती है। हालांकि यह ओवरलोड है। इसका वजन 45 टन के लगभग होता है, जबकि रैक में 70 टन बालू लोड होगी। यह 105 घन मीटर होती है।